आखिर ऐसा क्या हुआ जो CM विजय को मांगनी पड़ी माफी, जानिए पूरा मामला

आखिर ऐसा क्या हुआ जो CM विजय को मांगनी पड़ी माफी, जानिए पूरा मामला

Tamil Nadu News: तमिलनाडु विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के नाम को लेकर सोमवार को उस वक्त सियासी माहौल गरमा गया, जब एक मंत्री ने अपने भाषण के दौरान उनका नाम बिना सम्मानसूचक संबोधन के ले लिया। इस पर द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे सदन की मर्यादा से जोड़ते हुए विरोध दर्ज कराया। मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री थलपति विजय ने हस्तक्षेप किया और मंत्री की ओर से सदन में माफी मांगी।

क्या है पूरा मामला?

तमिलनाडु विधानसभा में 17 अगस्त को स्वास्थ्य और राजस्व विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान TVK यानी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम सरकार में वन मंत्री रंजीत कुमार चुनावों में कथित तौर पर पैसे बांटने की राजनीति का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने चर्चित थिरुमंगलम फॉर्मूला  का उल्लेख करते हुए अपने कांचीपुरम विधानसभा क्षेत्र में पिछले चुनावों के दौरान कथित तौर पर एक वोट के लिए 1,500 रुपये तक बांटे जाने की बात कही। मंत्री अपने भाषण में मौजूदा सरकार और पिछली चुनावी राजनीति के बीच अंतर समझा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और DMK के दिग्गज नेता मुथुवेल करुणानिधि का जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने उनके नाम के साथ ‘कलैञर’ या ‘पूर्व मुख्यमंत्री’ जैसे सम्मानसूचक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।

DMK विधायकों ने जताई आपत्ति

पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि का नाम इस तरह लिए जाने पर सदन में मौजूद DMK विधायकों ने तुरंत आपत्ति जताई और विपक्षी सदस्यों ने कहा कि विधानसभा में वरिष्ठ और प्रतिष्ठित नेताओं का जिक्र करते समय सम्मानजनक संबोधन का ध्यान रखा जाना चाहिए। देखते ही देखते इस मामले ने राजनीतिक बहस का रूप ले लिया। DMK विधायकों के भारी विरोध के बाद मुख्यमंत्री विजय ने मामले में हस्तक्षेप किया और माना कि करुणानिधि का नाम इस तरह लिया जाना उचित नहीं था। फिर विवाद को शांत कराने के लिए मुख्यमंत्री थलपति विजय ने मंत्री की ओर से सदन में माफी मांगी। उन्होंने कहा- कि वह मंत्री की ओर से माफी मांगते हैं और इस तरह करुणानिधि का उल्लेख किया जाना सही नहीं था।

क्यों अहम है यह विवाद?

पहली नजर में यह मामला केवल किसी नाम के साथ सम्मानसूचक शब्द इस्तेमाल करने को लेकर दिखाई देता है, लेकिन तमिलनाडु की राजनीति में इसका अपना अलग महत्व है। क्योंकि एम. करुणानिधि राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शूमार रहे हैं और उन्हें लंबे समय तक DMK के प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है इसके अलावा वह कई बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। ऐसे में विधानसभा के भीतर उनके नाम के इस्तेमाल को लेकर हुआ यह विवाद राजनीतिक और सदन की मर्यादा, दोनों लिहाज से चर्चा में आ गया। वहीं मुख्यमंत्री विजय की ओर से माफी मांगे जाने के बाद मामला फिलहाल शांत हो गया है। हालांकि, इस घटनाक्रम ने एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति में नेताओं के सम्मानजनक संबोधन, राजनीतिक परंपराओं और विधानसभा की गरिमा को लेकर बहस छेड़ दी है।

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