West Bengal News: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान अब पार्टी की चुनावी पहचान तक पहुंच गई है। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर आमने-सामने आए दोनों गुटों के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने आगामी विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न तय कर दिए हैं।
चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और उसे ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिह्न मिला है। वहीं, दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनाव के लिए की गई है। मूल टीएमसी नाम और उसके पुराने चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

कैसे शुरू हुआ TMC में नाम और सिंबल का विवाद?
तृणमूल कांग्रेस के अंदर नेतृत्व और संगठन पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आने के बाद मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा। दोनों गुटों ने पार्टी के नाम, संगठनात्मक ढांचे और चुनाव चिह्न पर अपना-अपना दावा पेश किया। आयोग ने दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और दलीलों पर विचार किया।
इसी बीच पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी नजदीक आ गए। ऐसे में आयोग के सामने दोनों गुटों के लिए चुनाव में अलग पहचान तय करने की जरूरत थी। आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए।
पुराने TMC नाम और ‘जोड़ाफूल’ सिंबल पर रोक
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों गुटों को पार्टी के पुराने नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ यानी दो फूल और घास वाले चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। यह रोक आगामी उपचुनाव के लिए लागू की गई है। इसके बाद दोनों पक्षों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए। 18 सितंबर को आयोग ने इन विकल्पों पर फैसला लेते हुए दोनों गुटों के लिए अलग पहचान तय कर दी। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिह्न मिला, जबकि अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया।
यह फैसला स्थायी नहीं है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर मूल विवाद पर अंतिम फैसला आगे की प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। फिलहाल यह व्यवस्था आगामी उपचुनाव को ध्यान में रखकर की गई है। इसके अलावा, दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के साथ-साथ मेघालय और त्रिपुरा में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में उपचुनाव के लिए मान्यता दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

