Nepal Flood News: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई इलाकों की तस्वीर बदलकर रख दी है। रासुवा और नुवाकोट जिलों में बाढ़ के पानी और मलबे ने घरों, दुकानों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तिमुरे और बेत्रावती उन इलाकों में शामिल हैं, जहां इस आपदा का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है। बुधवार सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूट गया। इसके बाद बर्फ, चट्टानों और मिट्टी का भारी मलबा पहाड़ से नीचे की ओर बहा और देखते ही देखते करीब 1.2 किलोमीटर के क्षेत्र में फैल गया। मलबा नदी तक पहुंचते ही भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और आसपास के कई नेपाली इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।
बाढ़ का असर त्रिशूली नदी पर भी बेहद तेज रहा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महज 30 मिनट में नदी का पानी करीब 9 मीटर ऊपर पहुंच गया। पानी और मलबे का तेज बहाव करीब 170 किलोमीटर तक फैल गया, जिससे नेपाल के सात जिले प्रभावित हुए। जहां कुछ समय पहले तक आबादी, सड़कें और दूसरी संरचनाएं मौजूद थीं, वहां अब बड़े पैमाने पर मलबा नजर आ रहा है। सामने आई तस्वीरें इस प्राकृतिक आपदा की गंभीरता और इसके व्यापक असर को दिखाती हैं। आपदा का असर सिर्फ एक कस्बे तक सीमित नहीं रहा। तिमुरे से नीचे की ओर भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में पानी और मलबे का असर साफ देखा गया। रास्ते में आने वाली कई बस्तियां और परिवहन मार्ग प्रभावित हुए। इसके अलावा रसुवा को चीन सीमा से जोड़ने वाला सड़क नेटवर्क भी कई जगह क्षतिग्रस्त हुआ है। पुलों के टूटने से राहत और बचाव अभियान में मुश्किलें बढ़ गई हैं।
फ्लैश फ्लड ने लिया रौद्र रूप
शुरुआती जानकारी में इस भीषण तबाही को लेकर भूकंप की बात सामने आई थी, लेकिन बाद की जानकारी में इसे सामान्य भूकंप की घटना नहीं माना गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के अचानक खिसकने से भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आया, जिसने फ्लैश फ्लड का रौद्र रूप ले लिया। इस तेज बहाव में पानी के साथ चट्टानें, मिट्टी और अन्य मलबा भी शामिल था। यही वजह रही कि नदी के किनारे स्थित बस्तियों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
बता दें कि नेपाल में आई इस आपदा में अब तक करीब 469 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 1,400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। संभावना है कि आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है। वहीं, सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान चला रही हैं। कई स्थानों पर सड़क और पुल टूटने की वजह से राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हेलीकॉप्टर तथा अन्य माध्यमों से प्रभावित लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
क्यों खास है तिमुरे?
रसुवा जिले में नेपाल-चीन सीमा के करीब स्थित तिमुरे एक अहम सीमावर्ती कस्बा है। रसुवागढ़ी सीमा नाके के कारण यह इलाका नेपाल और चीन के बीच व्यापार और आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। सीमा पार होने वाले कारोबार से जुड़ी कई गतिविधियां इसी क्षेत्र के आसपास संचालित होती हैं।
हालांकि, भीषण फ्लैश फ्लड ने तिमुरे की तस्वीर बदल दी। बाढ़ के पानी और मलबे ने कस्बे के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। बाजार क्षेत्र, सड़कें, वाहन और कई इमारतें प्रभावित हुईं। सीमा पर मौजूद कस्टम और व्यापार से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
तिमुरे की अहमियत सिर्फ सीमा व्यापार तक सीमित नहीं है। नेपाल के रास्ते सड़क मार्ग से कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु यहां रुककर भोजन और जरूरी सामान की व्यवस्था करते हैं। सीमा की ओर आगे बढ़ने से पहले तिमुरे यात्रियों को कई बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। ऐसे में यहां हुई तबाही का असर स्थानीय आबादी के साथ-साथ सीमा व्यापार और तीर्थयात्रा से जुड़ी गतिविधियों पर भी पड़ा है।
बेत्रावती क्यों है महत्वपूर्ण?
नुवाकोट जिले में त्रिशूली नदी के किनारे बसा बेत्रावती एक प्रमुख कस्बा है। इसे उत्तरगया के नाम से भी जाना जाता है। नेपाल की राजधानी काठमांडू से करीब 58 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित यह इलाका रसुवा जिले और रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र तक पहुंचने के लिए एक अहम मार्ग माना जाता है। इसे इस क्षेत्र तक पहुंचने वाला प्रमुख और एकमात्र वाहन योग्य सड़क संपर्क भी माना जाता है। बेत्रावती आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क और स्थानीय व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां से गुजरने वाली सड़कें पहाड़ी इलाकों को दूसरे हिस्सों से जोड़ती हैं और स्थानीय लोगों के आवागमन के साथ व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी इस्तेमाल होती हैं।
लेकिन भीषण बाढ़ के दौरान त्रिशूली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा भी बहकर आया। इसके चलते बेत्रावती और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक नुकसान हुआ। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि कुछ पुलों को भी नुकसान पहुंचा। संपर्क मार्ग प्रभावित होने के कारण राहत और बचाव टीमों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
तिमुरे और बेत्रावती की स्थिति ने दिखा दिया है कि पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड कितनी तेजी से बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है। कुछ ही समय में पानी और मलबे का तेज बहाव सड़क, पुल, बाजार और बस्तियों के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। जहां कभी सामान्य जनजीवन और आवाजाही दिखाई देती थी, वहां अब तबाही के निशान नजर आ रहे हैं।