दिल्ली की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलावों के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश मेहता की मौत ने हर किसी को हैरान कर दिया है। 1975 बैच के अधिकारी रहे राकेश मेहता ने नोएडा स्थित अपने फ्लैट में पर खुदकुशी कर ली। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उनकी मौत की वजह से जुड़े अहम संकेत मिले हैं।
राकेश मेहता ने तीन दशक से ज्यादा लंबे प्रशासनिक करियर में दिल्ली सरकार और MCD में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। साल 2007 में उन्हें दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया गया और नवंबर 2010 में वे रिटायर हुए। शीला दीक्षित सरकार के दौरान उन्होंने दिल्ली के प्रशासन और विकास से जुड़े कई अहम फैसलों में भूमिका निभाई थी। दिल्ली के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बदलाव के दौरान भी उनका योगदान अहम माना जाता है। ब्लूलाइन बसों को हटाने और उनकी जगह लो-फ्लोर बसों को बढ़ावा देने की प्रक्रिया में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा बिजली क्षेत्र में सुधार और 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के दौरान भी वे अहम प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
आखिर क्यों उठाया इतना बड़ा कदम?
राकेश मेहता के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि इतने अनुभवी और सफल अधिकारी ने आखिर अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला क्यों किया? पुलिस को मिले सुसाइड नोट से शुरुआती तौर पर इसका जवाब सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोट में उन्होंने मानसिक तनाव और अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का जिक्र किया था। वे हाइपरटेंशन, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाथ-पैर कांपने जैसी समस्याओं से परेशान बताए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है और यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि उनकी मौत के पीछे सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं या कोई और परिस्थिति भी जिम्मेदार थी।
नोएडा के फ्लैट में मिले थे मृत
राकेश मेहता नोएडा के सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी में रह रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे पिछले कुछ वर्षों से परिवार से अलग वहां रह रहे थे। रविवार को उनके फ्लैट में उनका शव मिला। पुलिस ने मौके से उनका मोबाइल फोन और सुसाइड नोट कब्जे में लिया और जांच शुरू की। राकेश मेहता के अचानक निधन से प्रशासनिक गलियारों में भी शोक की लहर है। जिन अधिकारियों और नेताओं ने उनके साथ काम किया, उन्होंने उन्हें एक कुशल, सकारात्मक और सुधारों को आगे बढ़ाने वाला अधिकारी बताया।
एक ऐसे अफसर, जिसने दिल्ली की परिवहन व्यवस्था से लेकर बड़े आयोजनों तक में अपनी भूमिका निभाई, उसका इस तरह अचानक चले जाना कई सवाल छोड़ गया है। फिलहाल पुलिस की जांच और सुसाइड नोट ही इस दुखद घटना की परिस्थितियों को समझने का सबसे अहम आधार हैं।