मशीनों से नहीं हिले 170 साल पुराने ‘खड़े हनुमान जी’, JCB नाकाम होने के बाद बुलाई गई IIT Indore की टीम

मशीनों से नहीं हिले 170 साल पुराने ‘खड़े हनुमान जी’, JCB नाकाम होने के बाद बुलाई गई IIT Indore की टीम

Ujjain : मध्य प्रदेश के उज्जैन से सामने आया एक मामला इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ हैं। सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कार्रवाई तो शुरू हुई, मंदिर का ढांचा भी हटा दिया गया, लेकिन जब बारी बजरंगबली की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की आई तो प्रशासन की आधुनिक मशीनें भी बेबस नजर आईं। कई घंटों की मशक्कत, JCB और क्रेन के इस्तेमाल के बावजूद करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा अपनी जगह से एक इंच तक नहीं हिली।

यह  पूरा मामला उज्जैन के कंठाल चौराहे से छत्री चौक जाने वाले मार्ग का है। सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के तहत इस सड़क को चौड़ा करने और शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर करने का काम चल रहा है। इसी सड़क चौड़ीकरण की जद में सती गेट के पास स्थित प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर भी आ गया। जानकारी के मुताबिक मंदिर करीब 170 साल पुराना बताया जाता है और इससे जुड़े दस्तावेजों में 1857 के आसपास इसकी स्थापना का उल्लेख मिलता है। मंदिर की सेवा कई पीढ़ियों से एक ही परिवार द्वारा किए जाने की बात भी सामने आई है।

मंदिर का ढांचा तो टूट गया, लेकिन प्रतिमा नहीं हिली

सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन ने मंदिर को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना बनाई। मंदिर की दीवारें और बाहरी ढांचा हटाने की कार्रवाई भी की गई। लेकिन प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती मंदिर के अंदर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाना थी। प्रतिमा को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली गई। भारी मशीनें और क्रेन मौके पर लगाई गईं। प्रतिमा के आसपास की जमीन और उसके आधार को भी समझने की कोशिश की गई। इसके बावजूद कई प्रयासों के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली।

JCB और मशीनों की ताकत भी पड़ गई कम?

सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि प्रतिमा को हटाने की कोशिश के दौरान JCB और दूसरी मशीनों को भी नुकसान पहुंचा, जबकि बजरंगबली की प्रतिमा जस की तस खड़ी रही। हालांकि, मशीनों के टूटने या खराब होने से जुड़ी सोशल मीडिया की हर जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इतना जरूर स्पष्ट है कि प्रशासन और विशेषज्ञों की कई कोशिशों के बावजूद प्रतिमा को हटाया नहीं जा सका। भक्त बोले- ये हनुमान जी की शक्ति है प्रतिमा के न हिलने के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों में आस्था और भी मजबूत होती दिखाई दी। मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में पहुंचे। यहां महाआरती, भजन-कीर्तन और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। भक्तों का कहना है कि जब इतनी बड़ी मशीनें भी प्रतिमा को नहीं हिला पा रही हैं, तो यह बजरंगबली की इच्छा और शक्ति का संकेत है। कई लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं और उनका कहना है कि भगवान जहां विराजमान हैं, वहीं रहना चाहते हैं।

विशेषज्ञ क्या मानते हैं?

जहां भक्त इसे चमत्कार से जोड़ रहे हैं, वहीं प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञ इस घटना को वैज्ञानिक और संरचनात्मक नजरिए से देख रहे हैं। प्रतिमा किस तरह जमीन में स्थापित है, उसका आधार कितना मजबूत है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए कैसे हटाया जा सकता है—इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। अब IIT इंदौर की विशेषज्ञ टीम भी इस मामले की तकनीकी जांच से जुड़ रही है। टीम यह समझने की कोशिश करेगी कि आखिर प्रतिमा का आधार और उसकी स्थापना किस तकनीक से हुई है, जिसकी वजह से आधुनिक मशीनों के बावजूद वह अपनी जगह से नहीं हिल रही।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क चौड़ीकरण का काम कैसे आगे बढ़ेगा। प्रशासन के सामने एक तरफ सिंहस्थ 2028 से पहले सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ श्रद्धालुओं की आस्था भी जुड़ी हुई है। फिलहाल प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए उसके आसपास व्यवस्था की गई है। वहीं, विशेषज्ञों की जांच के बाद ही आगे की रणनीति तय होने की उम्मीद है। जरूरत पड़ने पर सड़क के डिजाइन में बदलाव की संभावना की बात भी सामने आई है।

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