UP Education News: उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में लखनऊ में आयोजित ‘शिक्षक संवाद’ कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि एआई को शिक्षकों के विकल्प के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह शिक्षा को नई दिशा देने और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।
इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर रोजगार खत्म होने की चिंता जताई जा रही है, लेकिन तकनीक में बदलाव के साथ काम और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसलिए एआई को केवल चुनौती के तौर पर देखने के बजाय इसे एक अवसर के रूप में स्वीकार करने की जरूरत है।
बदलते दौर के साथ शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी
इस कार्यक्रम के दौरान यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भारत की समृद्ध शिक्षा परंपरा का भी जिक्र करते हुए कहा कि तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय हमेशा से ही देश की गौरवशाली शैक्षिक विरासत के प्रतीक रहे हैं। आज तकनीक तेजी से बदल रही है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को भी समय की जरूरतों के अनुसार विकसित करना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे विद्यार्थियों को सीखने के नए तरीके मिल सकते हैं और शिक्षकों को भी पढ़ाने में तकनीकी मदद मिल सकती है।
विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देते हैं शिक्षक
उपमुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक की भूमिका सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने और ज्ञान देने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह भावी पीढ़ी के निर्माण और संस्कारों के संवाहक भी हैं। बदलते शिक्षा परिवेश में शिक्षकों की जिम्मेदारी पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। शिक्षा से जुड़े अभियानों के माध्यम से बड़ी संख्या में बच्चे विद्यालयों से जुड़ रहे हैं और उन्हें बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
प्रदेश में 83 मेडिकल कॉलेज कर रहे काम
इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में फिलहाल 83 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले राज्य में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में करीब 40 मेडिकल कॉलेज ही थे। इसके अलावा, ब्रजेश पाठक ने कौशल विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को उनकी क्षमता और जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देने पर काम किया जा रहा है, ताकि उनके लिए नौकरी के साथ अपना काम शुरू करने के रास्ते भी खुल सकें और बदलती अर्थव्यवस्था और तकनीकी जरूरतों के मुताबिक खुद को तैयार कर सकें।
ODOP से यूपी के उत्पादों को मिली अंतरराष्ट्रीयपहचान
उपमुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रदेश के अलग-अलग जिलों के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक कारीगरी को देश के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि तकनीक और नए अवसरों के इस्तेमाल से प्रदेश के युवाओं और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार और कारोबार की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं।
शिक्षकों के साथ शिक्षा के मुद्दों पर चर्चा
शिक्षक संवाद कार्यक्रम के दौरान लखनऊ के अलग-अलग स्कूलों से पहुंचे शिक्षकों ने उपमुख्यमंत्री के सामने शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों से जुड़े कई मुद्दे रखे। इस बातचीत में शिक्षा की गुणवत्ता, एआई, तकनीकी बदलाव, नवाचार और बच्चों के भविष्य जैसे विषय प्रमुख रहे। शिक्षकों ने अपने सवाल और सुझाव साझा किए, जिन पर ब्रजेश पाठक ने विस्तार से जवाब दिया। इस कार्यक्रम में इंस्पिरेशन एकेडमिक कंसल्टेंट्स की प्रेरणा त्रिपाठी के अलावा लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों से जुड़े शिक्षक-शिक्षिकाएं और शिक्षण क्षेत्र के अन्य लोग मौजूद रहे।