vijay-mallya: भारतीय कारोबारी दुनिया के बड़े नामों में शुमार रहे विजय माल्या एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। ब्रिटेन में रह रहे माल्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और बैंक बकाया से जुड़े मामलों को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि लगातार झेल रहे ‘अन्याय’ से तो बेहतर होगा कि वह कॉकरोच बन जाएं। माल्या का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी संपत्तियों से हुई कथित रिकवरी, बैंक देनदारी और भारत लौटने से जुड़े कानूनी मामलों पर चर्चा है।
‘शायद मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए’
विजय माल्या ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने साथ हो रहें अन्याय का रोना रोते हुए लिखा- कि उन्होंने जितना अन्याय झेला है और अभी भी झेल रहे हैं, उसे देखते हुए उन्हें लगता है कि शायद उन्हें कॉकरोच बन जाना चाहिए क्योंकि हो सकता है कॉकरोच की दुनिया में जिंदगी कुछ बेहतर हो। माल्या की यह टिप्पणी उनके खिलाफ चल रही लंबी कानूनी लड़ाई के संदर्भ में सामने आई है। इससे पहले भी वह भारत में अपने खिलाफ होने वाली कार्रवाई और मीडिया में इस्तेमाल किए जाने वाले ‘भगोड़ा’ जैसे शब्दों पर आपत्ति जताते रहे हैं।
₹14 हजार करोड़ से ज्यादा की रिकवरी का दावा?
माल्या ने अपनी एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कार्रवाई का हवाला देते हुए दावा किया कि एजेंसी ने अदालत में दाखिल एक हलफनामे में 2021 में बैंकों को 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम दिए जाने की बात कही थी। माल्या ने अपने पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि अगर लोग उनकी बात पर भरोसा नहीं करते तो कम से कम ED की ओर से अदालत में कही गई बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
‘मेरी देनदारी से ज्यादा वसूली’
विजय माल्या लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि उनकी संपत्तियों से बैंकों और सरकारी एजेंसियों ने उनकी कथित देनदारी से अधिक रकम वसूल की है। अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान माल्या के वकील ने भी दावा किया था कि बैंक कंसोर्टियम करीब 15,000 करोड़ रुपये की वसूली कर चुका है, जबकि मूल दावे की रकम ब्याज समेत लगभग 6,203 करोड़ रुपये बताई गई थी। हालांकि अदालत ने इस दावे को तत्काल स्वीकार नहीं किया और SBI तथा ED से इसकी पुष्टि करने को कहा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगस्त में इस लंबे समय से चल रहे विवाद को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर भी टिप्पणी की थी। अदालत ने ED से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या वसूली और देनदारियों से जुड़ा मामला वास्तव में निपट चुका है।
अदालत में क्या हुआ था?
विजय माल्या की ओर से 2020 में दायर की गई याचिका में उनकी संपत्तियों की जब्ती और उन्हें बैंक की बकाया रकम की वसूली के लिए इस्तेमाल किए जाने से जुड़े आदेश को चुनौती दी गई थी। 12 अगस्त 2026 की सुनवाई में माल्या के वकील ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी संपत्तियों से हुई रिकवरी के बाद उनकी नागरिक देनदारियां प्रभावी तौर पर खत्म हो चुकी हैं। वकील ने करीब 15,000 करोड़ रुपये की रिकवरी का दावा किया था। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने SBI और अन्य संबंधित पक्षों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। अदालत का रुख यह था कि अगर वाकई देनदारी की भरपाई हो चुकी है तो वर्षों से लंबित विवाद को अब समाप्त करने की दिशा में बढ़ना चाहिए।
आखिर कौन हैं विजय माल्या?
विजय माल्या लंबे समय तक भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में शामिल रहे। वह यूनाइटेड ब्रुअरीज ग्रुप से जुड़े रहे और किंगफिशर ब्रांड के जरिए शराब कारोबार के साथ-साथ एविएशन सेक्टर में भी बड़ा नाम बने। किंगफिशर एयरलाइंस की शुरुआत के बाद माल्या ने विमानन क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश की। लेकिन कंपनी को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा और आखिरकार किंगफिशर एयरलाइंस का संचालन बंद हो गया। इसके बाद भारतीय बैंकों की बड़ी रकम बकाया होने का मामला सामने आया। माल्या के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और बैंक लोन से जुड़े कई मामले चले और उनकी संपत्तियों पर कार्रवाई शुरू हुई।
2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे माल्या
विजय माल्या मार्च 2016 में भारत से ब्रिटेन चले गए थे। इसके बाद भारतीय जांच एजेंसियों ने उनके खिलाफ चल रहे मामलों में कानूनी कार्रवाई तेज की। भारत सरकार ने उन्हें वापस भारत लाने के लिए ब्रिटेन में प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू की। माल्या ने दूसरी तरफ अपने खिलाफ लगे आरोपों को चुनौती दी और कई मौकों पर कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है।
माल्या का कहना है कि वह ब्रिटेन में लंबे समय से रह रहे हैं और मौजूदा कानूनी प्रतिबंधों के कारण उनकी भारत यात्रा संभव नहीं है। सितंबर 2026 में भी उन्होंने सोशल मीडिया पर इसी दलील को दोहराते हुए कहा कि उन्हें ‘भगोड़ा’ कहना सही नहीं है क्योंकि उनके मुताबिक वह कानूनी तौर पर ब्रिटेन से बाहर नहीं जा सकते।
सरकार की नजर में क्या है स्थिति?
माल्या के दावों के बीच एक अहम तथ्य यह है कि भारत में उन्हें Fugitive Economic Offender घोषित किया जा चुका है। अक्टूबर 2025 में तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया था कि कुल 15 लोगों को Fugitive Economic Offenders Act, 2018 के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था, जिनमें विजय माल्या का नाम भी शामिल था। यानी माल्या भले ही अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताते हैं, लेकिन भारत में उनकी कानूनी स्थिति को लेकर सरकारी रिकॉर्ड अलग तस्वीर पेश करता है।
संपत्तियों की जब्ती और रिकवरी का मामला
माल्या के मामले में उनकी संपत्तियों को अटैच करने और फिर उससे बैंक की बकाया रकम की वसूली का मुद्दा लंबे समय से अदालतों में रहा है। माल्या की ओर से दावा किया गया है कि उनकी करीब 14,131 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है और यह रकम उनकी कथित देनदारी से काफी अधिक है। वहीं, बैंक और जांच एजेंसियों से जुड़े पक्षों के बीच इस पूरी गणना और रिकवरी की स्थिति को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी रही है। यही वजह है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी अगस्त 2026 में ED और बैंक कंसोर्टियम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
विजय माल्या का ताजा ‘कॉकरोच’ वाला बयान उनके पुराने विवाद को फिर सुर्खियों में ले आया है। एक तरफ वह अपने ऊपर हुई कार्रवाई को अन्याय बताते हुए यह सवाल उठा रहे हैं कि जब बैंकों को बड़ी रकम वापस मिल चुकी है तो उनके खिलाफ कार्रवाई और उन्हें ‘भगोड़ा’ कहे जाने का सिलसिला क्यों जारी है। दूसरी तरफ, उनका नाम अभी भी भारत में भगोड़ा आर्थिक अपराधी के तौर पर दर्ज है और उनके खिलाफ लंबी कानूनी प्रक्रिया का इतिहास मौजूद है। ऐसे में माल्या का नया बयान सिर्फ सोशल मीडिया की हलचल नहीं है, बल्कि यह उस लंबे कानूनी विवाद की ओर भी इशारा करता है जो किंगफिशर एयरलाइंस के संकट के बाद शुरू हुआ और आज तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।