दुनिया के नक्शे में बड़ा बदलाव! UN में भारी बहुमत से पास हुआ प्रस्ताव, अब वर्ल्ड मैप पर बड़ा दिखेगा अफ्रीका

दुनिया के नक्शे में बड़ा बदलाव! UN में भारी बहुमत से पास हुआ प्रस्ताव, अब वर्ल्ड मैप पर बड़ा दिखेगा अफ्रीका

World Map Changed: बचपन से किताबों और ग्लोब पर जिस दुनिया के नक्शे को हम देखते आ रहे हैं, उसे लेकर अब एक बड़ा बदलाव सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शे को ज्यादा वास्तविक रूप में दिखाने से जुड़े अहम प्रस्ताव ‘Correct the Map’ को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी गई है। टोगो की अगुवाई में लाए गए इस प्रस्ताव के समर्थन में 164 देशों ने मतदान किया, जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया और छह देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इस प्रस्ताव के बाद अब अफ्रीका के वास्तविक आकार को नक्शे पर ज्यादा सटीक तरीके से दिखाने की दिशा में कदम बढ़ा है।

‘Correct the Map’ प्रस्ताव पर UN में हुई वोटिंग

दरअसल, शुक्रवार (4 सितंबर) को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अफ्रीका के वास्तविक आकार को दर्शाने वाले ‘Correct the Map’ प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। वहीं टोगो (पश्चिम अफ्रीका में स्थित एक छोटा देश) द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को अफ्रीकी संघ के बाकी 54 सदस्य देशों समेत कई अन्य देशों का समर्थन मिला। इस वोटिंग में 164 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जबकि सिर्फ अमेरिका ने इसका विरोध किया। वहीं सर्बिया, एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

संयुक्त राष्ट्र में अफ्रीकी संघ के स्थायी पर्यवेक्षक मिशन ने प्रस्ताव पारित होने का स्वागत किया। मिशन ने टोगो और अफ्रीकी समूह को बधाई देते हुए इसे वैश्विक मानचित्रों में अफ्रीका के वास्तविक भौगोलिक आकार को बेहतर तरीके से दर्शाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। अफ्रीकी संघ आयोग ने भी इस फैसले का स्वागत किया। आयोग के अध्यक्ष महमूद अली यूसुफ ने इस पहल को आगे बढ़ाने में टोगो की नेतृत्वकारी भूमिका और अफ्रीकी देशों की एकजुटता की सराहना की।

16वीं शताब्दी में बना मर्केटर मैप क्यों विवादों में रहा?

यह पहल लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे मर्केटर प्रोजेक्शन पर केंद्रित है। और इस मर्केटर मानचित्र को 1569 में फ्लैमिश कार्टोग्राफर गेरार्डस मर्केटर ने डिजाइन किया था यह मानचित्र मुख्य रूप से समुद्री नेविगेशन के लिए तैयार किया गया था। हालांकि, पृथ्वी के गोल आकार को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें अलग-अलग क्षेत्रों का आकार वास्तविकता से अलग नजर आता है।

अफ्रीकी संघ आयोग के अनुसार, मर्केटर प्रोजेक्शन खासतौर पर अफ्रीका के आकार को वास्तविकता से काफी छोटा दिखाता है। इसका एक प्रमुख उदाहरण अफ्रीका और ग्रीनलैंड के आकार को लेकर है। क्योंकि मर्केटर मैप में दोनों लगभग एक जैसे आकार के दिखाई देते हैं, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल के हिसाब से अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।

‘Equal Earth’ मैप पर दिया गया जोर

संयुक्त राष्ट्र ने सरकारों और संस्थानों को पारंपरिक मर्केटर प्रोजेक्शन की जगह ‘Equal Earth’ प्रोजेक्शन जैसे समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्रों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया है। इस तरह के मानचित्रों में महाद्वीपों और देशों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात के ज्यादा करीब दिखाया जाता है। इसका सबसे बड़ा अंतर अफ्रीका और ग्रीनलैंड के आकार में नजर आता है।

‘नक्शे दुनिया को समझने का तरीका तय करते हैं’

इस प्रस्ताव पर मतदान से पहले टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी ने नक्शों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा- कि नक्शे दुनिया के बारे में हमारी समझ को आकार देते हैं। उनके मुताबिक, ये शिक्षा को दिशा देने, हमारी कल्पना को विकसित करने और लोगों की सामूहिक सोच को प्रभावित करने में भूमिका निभाते हैं। बता दें कि टोगो ने ही इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया था और अफ्रीकी संघ के कई देशों ने इसका समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र के इस कदम का कई देशों ने स्वागत किया और ‘Equal Earth’ जैसे मानचित्रों को अपनाने की अपील की।

इसके अलावा फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने मतदान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा- कि नक्शा बदलने से दुनिया नहीं बदलती, लेकिन दुनिया को गलत तरीके से दिखाने वाली प्रस्तुति को ठीक करना सच्चाई की दिशा में एक कदम है।

अफ्रीकी देशों ने क्यों उठाई यह पहल?

अफ्रीकी देशों और इस अभियान से जुड़े संगठनों का कहना है कि लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे पारंपरिक नक्शों में अफ्रीका का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच को बदलने और दुनिया के नक्शे में अफ्रीका की भौगोलिक स्थिति और आकार को अधिक सटीक रूप में दिखाने के उद्देश्य से यह पहल आगे बढ़ाई गई।

हालांकि संयुक्त राष्ट्र के इस प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि मर्केटर प्रोजेक्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है या इसे अनिवार्य रूप से हटाने का आदेश दिया गया है। बल्कि इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य सरकारों और संस्थानों को ‘Equal Earth’ जैसे समान-क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्शन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना है। इस फैसले को अफ्रीकी देशों और लंबे समय से अभियान चला रहे संगठनों की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जो दुनिया के नक्शों में अफ्रीका के वास्तविक भौगोलिक आकार को सही तरीके से दिखाने की मांग करते रहे हैं।

 

 

 

 

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