BRICS : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कि वह BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। अगर उनका दौरा तय होता है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच आमने-सामने मुलाकात की संभावना भी बन सकती है। दोनों नेताओं की इस मुलाकात पर भारत-चीन संबंधों के लिहाज से खास नजर रहेगी।
यह बैठक हुई तो गलवान घाटी में जून 2020 की हिंसक झड़प के बाद भारत में दोनों नेताओं की पहली औपचारिक द्विपक्षीय मुलाकात होगी। उस घटना में भारत के 20 जवानों की जान गई थी, जबकि चीन ने बाद में अपने 4 सैनिकों के मारे जाने की जानकारी दी थी। फिलहाल शी जिनपिंग के भारत आने को लेकर नई दिल्ली और बीजिंग की ओर से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी गुरुवार को इस संबंध में जानकारी होने से इनकार किया। गौरतलब है कि जिनपिंग इससे पहले 2019 में भारत दौरे पर आए थे।
गलवान के बाद रिश्तों में आया बड़ा तनाव
गलवान के बाद भारत और चीन के बीच लंबे समय तक सैन्य और कूटनीतिक बातचीत चलती रही। सीमा पर तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। धीरे-धीरे दोनों देशों ने रिश्तों को सामान्य दिशा में ले जाने की कोशिश शुरू की। यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। गलवान के बाद दोनों नेताओं की पहली मुलाकात 2024 में रूस के कज़ान में हुई थी। 23 अक्टूबर 2024 को BRICS सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग ने द्विपक्षीय बातचीत की थी। इसके बाद अगस्त 2025 में दोनों नेताओं की चीन के तियानजिन में SCO सम्मेलन के दौरान भी मुलाकात हुई।
अब दिल्ली में होगी आमने-सामने बातचीत
अब 2026 के BRICS सम्मेलन में जिनपिंग की भारत यात्रा इसलिए अहम है क्योंकि यह 2019 के बाद उनकी भारत की पहली यात्रा होगी। दोनों नेताओं की प्रस्तावित बैठक में सीमा पर शांति, द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे अहम रह सकते हैं। भारत लगातार सीमा पर शांति और स्थिरता को दोनों देशों के संबंधों के लिए जरूरी बताता रहा है। भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ समय में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। ऐसे में दिल्ली में जिनपिंग की मौजूदगी और मोदी के साथ उनकी बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों में आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर दोनों नेताओं की बातचीत और उसके बाद सामने आने वाले फैसलों से साफ होगी।
BRICS की अध्यक्षता इस बार भारत के पास
इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता भारत कर रहा हैं। यह संगठन दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच पर लाता हैं। समूह में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। भारत की मेजबानी में पूरे साल देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठकों, मंत्रीस्तरीय कार्यक्रमों और विभिन्न मुद्दों पर चर्चाओं का सिलसिला जारी हैं। इस दौरान भारत का जोर ग्लोबल साउथ के देशों की भूमिका मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और मजबूत सप्लाई चेन पर हैं। भारत BRICS को केवल कूटनीतिक या राजनीतिक संवाद तक सीमित रखने के बजाय व्यापार, निवेश और विकास से जुड़े सहयोग का प्रभावी मंच बनाने की दिशा में भी काम कर रहा हैं।