Kolkata law college : कोलकाता के एक लॉ कॉलेज से जुड़ी ऐसी खबर सामने आई है, जिसने कॉलेज कैंपस में छात्राओं की सुरक्षा और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कॉलेज परिसर में कुछ ऐसे कमरे मौजूद थे, जिनका इस्तेमाल सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों के बजाय संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया जाता था। छात्राओं की ओर से कथित तौर पर गलत नजर रखने और उन पर ‘कॉम्प्रोमाइज’ करने का दबाव बनाए जाने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और मामले में सामने आने वाले हर दावे को जांच के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। कोलकाता के इस लॉ कॉलेज से जुड़े मामले मे कैंपस के अंदर मौजूद कुछ कमरों को लेकर विवाद सामने आया हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये कमरे सामान्य क्लासरूम या आधिकारिक शैक्षणिक इस्तेमाल से अलग तरीके से इस्तेमाल किए जाते थे। इन्हें लेकर छात्रों के बीच भी लंबे समय से चर्चा होने की बात सामने आई है। मामला सिर्फ कमरों तक सीमित नहीं है। छात्राओं की ओर से कथित दुर्व्यवहार और अनुचित दबाव से जुड़े आरोप सामने आए। ‘कॉम्प्रोमाइज’ के लिए दबाव बनाने जैसे आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
छात्राओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
किसी भी शैक्षणिक संस्थान में छात्राओं की सुरक्षा सबसे अहम मुद्दों में शामिल होती है। ऐसे में अगर कैंपस के भीतर ही छत्राओं को असहज या असुरक्षित महसूस करने वाली कोई स्थिति सामने आती है, तो कॉलेज प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि अगर कैंपस में संदिग्ध गतिविधियों को लेकर शिकायतें थीं, तो समय रहते प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए गए। साथ ही, इन कमरों के इस्तेमाल और वहां होने वाली गतिविधियों की निगरानी किस स्तर पर की जाती थी, यह भी जांच का विषय हो सकता है।
आरोपों कीजांच से सामने आएगा सच
फिलहाल इस पूरे मामले में सामने आए आरोपों को जांच के बाद ही अंतिम रूप से सही या गलत माना जा सकता है। यह भी जरूरी है कि छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।