https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-4295913954012131

SBI Data Leak: एसबीआई के 3,897 ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर उजागर होने की आशंका, जानिए बैंंक ने क्या कहा

SBI Data Leak: एसबीआई के 3,897 ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर उजागर होने की आशंका, जानिए बैंंक ने क्या कहा

SBI Data Leak: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंकों में शामिल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से जुड़ी साइबर सुरक्षा की एक घटना ने ग्राहकों के निजी डेटा की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, साइबर सुरक्षा से जुड़ी इस घटना में 3,897 ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान से संबंधित जानकारी डार्क वेब लीक होने की बात सामने आई है। जिसमें ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, डेट  ऑफ बर्थ, ईमेल एड्रेस और होम एड्रेस जैसी कई निजी जानकारियां शामिल होने की बात कही गई है। इसके अलावा कुछ रिकॉर्ड्स में बैंकिंग से संबंधित विवरण भी मौजूद होने की आशंका है।

शुरुआती जांच में लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 3,897 रिकॉर्ड्स ऐसे मिले, जिनमें ग्राहकों की पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इन सभी रिकॉर्ड्स की प्रामाणिकता और डेटा लीक की वास्तविक सीमा को लेकर जांच अभी जारी है। एसबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस घटना का उसकी मुख्य बैंकिंग सेवाओं और सामान्य कामकाज पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है।

कैसे सामने आया SBI के ग्राहकों का डेटा लीक होने का मामला?

भारतीय स्टेट बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई अपनी फाइलिंग में ग्राहक रिकॉर्ड्स से जुड़ी साइबर सुरक्षा घटना की जानकारी दी है। बैंक के अनुसार, उसे आशंका है कि 3,897 ग्राहकों की व्यक्तिगत पहचान संबंधी जानकारी यानी पर्सनल आइडेंटिफायबल इन्फॉर्मेशन (PII) डार्क वेब पर उजागर हुई है।

इस मामले में डार्क वेब पर उपलब्ध लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड्स की शुरुआती जांच की गई। इस विश्लेषण के दौरान 3,897 रिकॉर्ड्स की पहचान की गई, जिनमें ग्राहकों की निजी जानकारी होने की आशंका है। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि डार्क वेब पर मौजूद सभी 3.75 लाख रिकॉर्ड्स को एसबीआई के प्रभावित ग्राहकों का डेटा नहीं माना गया है। शुरुआती जांच में केवल 3,897 रिकॉर्ड्स को संभावित रूप से संबंधित पाया गया है। बैंक की ओर से इन रिकॉर्ड्स की प्रामाणिकता, उनमें मौजूद जानकारियों और डेटा के वास्तविक दायरे का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

एसबीआई ग्राहकों की कौन-कौन सी निजी जानकारियां हुईं उजागर?

इस साइबर सुरक्षा घटना को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, डार्क वेब पर मिले रिकॉर्ड्स में ग्राहकों की पहचान और बैंक के रिकॉर्ड से संबंधित कई तरह की जानकारियां शामिल होने की आशंका है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित विवरण शामिल बताए गए हैं:

ग्राहकों के नाम और व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी।

बैंक में दर्ज मोबाइल नंबर और अन्य संपर्क विवरण।

ग्राहकों के रजिस्टर्ड ईमेल एड्रेस।

जन्मतिथि और घर के पते जैसी निजी जानकारियां।

बैंक की शाखाओं से संबंधित रिकॉर्ड और मेटाडेटा।

ग्राहकों से संबंधित कुछ फाइलें और अन्य रिकॉर्ड।

कुछ रिकॉर्ड्स में IFSC कोड जैसी बैंकिंग से जुड़ी जानकारी होने की बात भी सामने आई है।

हालांकि, इन सभी जानकारियों के वास्तविक रूप से उजागर होने और उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। बैंक ने अभी तक डेटा एक्सपोजर की पूरी सीमा को लेकर अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।

16 अक्टूबर को मिला था संभावित डेटा एक्सपोजर का अलर्ट

एसबीआई के मुताबिक, उसे 16 अक्टूबर को ग्राहकों के डेटा के संभावित रूप से उजागर होने से संबंधित अलर्ट प्राप्त हुआ था। यह जानकारी थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर, डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से मिले अलर्ट के जरिए सामने आई। अलर्ट मिलने के बाद बैंक ने मामले की जांच शुरू की और साइबर सुरक्षा से संबंधित अपनी प्रतिक्रिया एवं नियंत्रण प्रक्रियाओं को सक्रिय कर दिया। इसका उद्देश्य घटना की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और इसके संभावित प्रभाव को सीमित करना है।

इस मामले को लेकर इससे पहले एक रिपोर्ट में सीरियसएक्सएम (SeriousXM) नाम के हैकर ग्रुप के दावे का भी उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस ग्रुप ने डार्क वेब फोरम ब्रीचफोरम (BreachForums) पर एसबीआई के लगभग 3.75 लाख ग्राहकों से संबंधित जानकारी होने का दावा किया था। हालांकि, बैंक की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में इस घटना के पीछे किसी विशेष हैकर ग्रुप की भूमिका की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इस ग्रुप के दावे को फिलहाल प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। डेटा कहां से आया और इसके पीछे किसकी भूमिका हो सकती है, इसका पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

एसबीआई ने क्या कहा? बैंकिंग सेवाओं पर कितना असर पड़ा?

ग्राहकों के डेटा के संभावित एक्सपोजर की खबर के बीच एसबीआई ने स्पष्ट किया है कि उसकी मुख्य बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। बैंक के मुताबिक, इस घटना का उसके प्रमुख कारोबारी कार्यों, वित्तीय प्रदर्शन और बिजनेस निरंतरता पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है। एसबीआई ने यह भी बताया कि साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटना का पता चलने के बाद उसने तत्काल अपने साइबर इंसिडेंट रिस्पॉन्स और कंटेनमेंट प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य साइबर सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई करना, संभावित नुकसान को सीमित करना और संबंधित जोखिमों का आकलन करना है।

पहले भी बैंकिंग सेक्टर में सामने आ चुके हैं डेटा लीक के मामले

आपको बता दें कि ऐसा पहली दफा नही है जब बैंकिग सेक्टर में डेटा लीक का मामला सामने आया हो, बल्कि इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे है जुलाई के महीने में बैंक ऑफ बड़ौदा से संबंधित एक डेटा लीक की खबर भी सामने आई थी, जिसमें 1 टीबी ग्राहक डेटा के लीक होने की बात स्वीकार किए जाने का उल्लेख किया गया था।

आज के डिजिटल दौर में जहां बैंकिंग सेवाओं में मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है ऐसे में ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा बैंकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। क्योंकि मोबाइल नंबर, ईमेल एड्रेस और अन्य पहचान संबंधी जानकारियां गलत हाथों में पहुंचने पर उनका इस्तेमाल फर्जी कॉल, फिशिंग मैसेज या अन्य तरह की धोखाधड़ी के प्रयासों में किया जा सकता है।

एसबीआई ग्राहकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

डेटा एक्सपोजर की आशंका को देखते हुए एसबीआई के ग्राहकों को सतर्क रहना चाहिए। यदि किसी ग्राहक को बैंक के नाम पर संदिग्ध कॉल, मैसेज, ईमेल या लिंक प्राप्त होता है, तो उसकी सत्यता की जांच किए बिना उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए। ग्राहकों को अपना ओटीपी, एटीएम या डेबिट कार्ड पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। बैंक कर्मचारी होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति को भी ऐसी जानकारी नहीं देनी चाहिए। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान वेबसाइट पर बैंकिंग विवरण दर्ज करने से बचना चाहिए।

यदि किसी ग्राहक को अपने खाते में संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है या बैंक के नाम पर धोखाधड़ी का प्रयास होता है, तो उसे तुरंत एसबीआई के आधिकारिक माध्यमों से संपर्क करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर साइबर अपराध की शिकायत भी दर्ज करानी चाहिए। फिलहाल एसबीआई के मामले में जांच जारी है और डेटा एक्सपोजर की वास्तविक सीमा स्पष्ट होना बाकी है। ऐसे में ग्राहकों के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

ये भी पढ़ें:- प्रीपेड यूजर्स के लिए बड़ी खबर! 28 दिन नहीं, अब 30 दिन की होगी रिचार्ज वैलिडिटी, कॉल-SMS वाला पैक भी उपलब्ध

administrator

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *