UPI MDR: दिवाली और धनतेरस पर खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों और कारोबारियों के लिए यूपीआई (UPI) से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है। डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की प्रस्तावित व्यवस्था को फिलहाल आगे बढ़ा दिया गया है। यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने त्योहारों के दौरान बाजार में बढ़ने वाली खरीदारी और व्यापारियों की चिंताओं को देखते हुए यह फैसला लिया है। अब चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर नया MDR फ्रेमवर्क दिवाली के बाद लागू किया जाएगा। इसकी नई तारीख का ऐलान अलग से किया जाएगा।

क्या था UPI MDR का नया प्रस्ताव?
UPI MDR फ्रेमवर्क को लेकर 14 सितंबर 2026 को नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसके अगले दिन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने इस संबंध में सर्कुलर जारी किया। इस प्रस्ताव के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की योजना थी।
प्रस्ताव के मुताबिक, 2,000 रुपये तक के निर्धारित लेनदेन पर MDR शून्य रखने की बात कही गई थी, जबकि 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत तक MDR लागू करने का प्रावधान था। इसके अलावा, कुछ ट्रांजैक्शन कैटेगरी में 5 रुपये से लेकर 300 रुपये तक के शुल्क का भी उल्लेख किया गया था। हालांकि, त्योहारों के दौरान कारोबार पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था को फिलहाल टालने का फैसला लिया गया है। अब दिवाली के बाद इसकी नई प्रभावी तारीख घोषित की जाएगी।
UPI MDR on Select Merchant Transactions Shall be Implemented Post Diwali
Press Release Link: https://t.co/5KMjOP0tHd https://t.co/pD8IKfN6sR
— NPCI (@NPCI_NPCI) October 13, 2026
क्या होता है MDR?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा के बदले व्यापारी से लिया जा सकता है। यह भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी सेवाओं के लिए निर्धारित किया जाता है। इसकी दर और लागू होने की शर्तें इस बात पर निर्भर करती हैं कि किस तरह के लेनदेन और व्यापारियों को इसके दायरे में रखा गया है। MDR को ग्राहकों की ओर से सीधे चुकाया जाने वाला शुल्क समझना सही नहीं है। इसका सीधा संबंध व्यापारी को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर लगने वाले चार्ज से होता है। हालांकि, व्यापारियों की लागत पर इसका असर पड़ सकता है।
आम ग्राहकों और दुकानदारों पर क्या होगा असर?
MDR लागू करने का फैसला टलने से फिलहाल संबंधित व्यापारी पुराने नियमों के तहत यूपीआई भुगतान करना जारी रख सकेंगे। इससे दिवाली और धनतेरस के दौरान खरीदारी करने वाले ग्राहकों को भी डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल में किसी नए मर्चेंट चार्ज को लेकर तत्काल बदलाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।


