प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, डिजिटल तकनीक और आर्थिक विकास की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत को ‘मदर ऑफ डेमोक्रेसी’ यानी लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। भारत ने दुनिया को शून्य दिया, लेकिन इसके लिए कभी श्रेय या रॉयल्टी की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत केवल अपनी प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश दूसरे देशों और समाजों को आगे बढ़ने के अवसर देने में भी विश्वास रखता है।

अपने करीब 25 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था, स्टार्टअप इकोसिस्टम, सस्ती दवाओं, वैक्सीन की आपूर्ति और आर्थिक सुधारों सहित कई विषयों पर बात की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत पर भरोसा करती है। भारत अपनी तकनीकी क्षमताओं और संसाधनों का इस्तेमाल केवल अपने विकास के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लाभ के लिए करना चाहता है।
भारत की विविधता और लोकतंत्र की ताकत का किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में 100 से अधिक भाषाएं हैं और देश में करीब 80 हजार पंजीकृत समाचार पत्र एवं प्रकाशन मौजूद हैं। इसके अलावा, देश में एक हजार से ज्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। सोशल मीडिया के क्षेत्र में भी भारत की बड़ी मौजूदगी है। उनके मुताबिक, देश में 50 करोड़ से अधिक यूट्यूब और 50 करोड़ से ज्यादा इंस्टाग्राम यूजर्स हैं। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर चर्चा होती है। लोग अपनी राय रखते हैं और विभिन्न विषयों पर बहस करते हैं। इस प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत की विविधता और लोकतांत्रिक व्यवस्था देश की बड़ी ताकत हैं।
एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से स्ट्रीट वेंडर और कार शोरूम का कारोबार
डिजिटल भुगतान व्यवस्था की विशेषता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में एक छोटे स्ट्रीट वेंडर और बड़े कार शोरूम का कारोबार, दोनों का आकार और जरूरतें अलग-अलग हैं। इसके बावजूद दोनों डिजिटल भुगतान के एक ही प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने इसे समावेशी तकनीक की ताकत बताते हुए कहा कि भारत ने ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिसमें तकनीक का लाभ समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री ने विदेशी मेहमानों से भी भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आजमाने की अपील की।

2014 से पहले कुछ सौ स्टार्टअप, अब 2.5 लाख से ज्यादा
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में स्टार्टअप की बढ़ती संख्या को देश में बदलते कारोबारी माहौल का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले भारत में स्टार्टअप की संख्या कुछ सौ तक सीमित थी, जबकि अब यह आंकड़ा 2.5 लाख से अधिक हो गया है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि करीब आधे स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं। वहीं, लगभग 45 प्रतिशत स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक या पार्टनर है।
25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में गरीबी उन्मूलन और आम लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में भारत में करीब 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को केवल सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने के अवसर देना भी है। डिजिटल तकनीक और सस्ती इंटरनेट सेवाओं ने इस दिशा में अहम भूमिका निभाई है। पीएम मोदी ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोबाइल डेटा की कीमतों में आई कमी से छोटे शहरों और कस्बों के छात्रों को काफी फायदा हुआ है। अब वे ऑनलाइन पढ़ाई, नई जानकारियों और रोजगार से जुड़े अवसरों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में
सरकारी योजनाओं में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने ऐसी व्यवस्था तैयार की है, जिसके माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार को कम करने में मदद मिली है। साथ ही, नागरिकों और सरकार के बीच सीधा संपर्क स्थापित हुआ है, जिससे लोगों को सरकारी सुविधाएं हासिल करने में आसानी हुई है।
भारत की GDP ग्रोथ 7.8%, विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक
आर्थिक विकास की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की विकास दर और विदेशी मुद्रा भंडार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रही है, जबकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक है। उन्होंने आर्थिक सुधारों, कारोबार को आसान बनाने और निवेश के अवसर बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

कोविड के दौरान 100 से ज्यादा देशों तक पहुंचाई वैक्सीन
प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान भारत की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 संकट के समय भारत ने 100 से अधिक देशों तक वैक्सीन पहुंचाई। उन्होंने कहा कि भारत अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल केवल अपने नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि दूसरे देशों की मदद करने और पूरी मानवता के हित में करना चाहता है। उनके अनुसार, ज्ञान, धन और शक्ति का वास्तविक महत्व इस बात से तय होता है कि उनका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाता है।
AI और सप्लाई चेन बन रहे हैं वैश्विक शक्ति के नए साधन
प्रधानमंत्री मोदी ने बदलते वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा, खनिज संसाधन, तकनीक और सप्लाई चेन अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इन क्षेत्रों पर नियंत्रण देशों के बीच दबाव बनाने का माध्यम भी बन सकता है। ऐसे समय में दुनिया को भरोसेमंद साझेदारों की आवश्यकता है, जो सहयोग और साझा विकास को प्राथमिकता दें। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दूसरे देशों के लिए अवसर पैदा करने और विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने में विश्वास रखता है। भारत की कोशिश है कि तकनीक और विकास का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
क्या है ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम?
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की शुरुआत साल 2018 में ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग ने की थी। इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करना और उनके समाधान तलाशने के लिए सरकारों तथा निजी क्षेत्र के प्रमुख लोगों को एक मंच पर लाना है। इस मंच पर विभिन्न देशों के नेता, मंत्री, बड़ी कंपनियों के CEO, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होते हैं और यहां वैश्विक व्यापार, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाता है।
वहीं इस साल फोरम की थीम ‘बदलती दुनिया में ताकत के नए स्रोत तय करना’ रखी गई है। दिल्ली में आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 15 अक्टूबर को समाप्त होगा। इस कार्यक्रम में वैश्विक राजनीति, कारोबार और तकनीक से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें ब्लूमबर्ग के संस्थापक माइकल ब्लूमबर्ग, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, इटली के पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के पूर्व अध्यक्ष मारियो द्रागी, अमेरिका की पूर्व वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो और मॉडर्ना के सह-संस्थापक नौबार अफेयान शामिल हैं।
इसके अलावा, सिस्को के CEO चक रॉबिंस, ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष जोनाथन ग्रे और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर जैसी हस्तियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। इस दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, निवेश, तकनीकी बदलाव और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समीकरणों पर चर्चा की जाएगी।

