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तिब्बत में 7.0 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, 16 लोगों की गई जान, 65 घायल ,सैकड़ों मकान ढहे

तिब्बत में 7.0 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, 16 लोगों की गई जान, 65 घायल ,सैकड़ों मकान ढहे

तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के भूकंप के बाद कई इलाकों में मकान ढह गए, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और बिजली तथा संचार सेवाओं पर भी असर पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा में करीब 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 65 लोग घायल बताए जा रहे हैं। भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के साथ ही प्रशासन नुकसान का आकलन करने में जुटा है।

रात में आए भूकंप से दहशत, कई इमारतों को नुकसान

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप के झटके गुरुवार रात महसूस किए गए। झटकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। स्थानीय रिपोर्टों में 300 से अधिक मकानों के ढहने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ जगह यह संख्या 339 बताई गई है। भूकंप का असर तिब्बत के कई इलाकों में महसूस किया गया। क़मदो और न्यिंगची जैसे शहरों में भी लोगों ने तेज झटके महसूस किए। इस भूकंप के बाद से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच दहशत का माहौल है। इसके अलावा प्रशासन की टीमें क्षतिग्रस्त इमारतों का निरीक्षण कर रही हैं और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

नागकू के पूर्वोत्तर में था भूकंप का केंद्र

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र तिब्बत के नागकू शहर से लगभग 190 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में था। यह स्थान क्षेत्रीय राजधानी ल्हासा से करीब 390 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित पहाड़ी क्षेत्र में पड़ता है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, भूकंप का केंद्र बाकेन काउंटी के मारू टाउनशिप में था। टाउनशिप के उप-प्रमुख ल्हावांग डैगपो ने बताया कि झटकों के कारण कार्यालय की दीवारों में दरारें आ गईं। इसके अलावा काउंटी मुख्यालय में बिजली और दूरसंचार सेवाएं भी प्रभावित हुईं।

बचाव अभियान में जुटे सैकड़ों कर्मचारी

भूकंप के बाद प्रशासन ने प्रभावित इलाके में लेवल-II आपातकालीन प्रतिक्रिया लागू की है। राहत कार्यों को गति देने के लिए भूकंप के केंद्र के आसपास 300 से अधिक पुलिस अधिकारियों को भेजा गया है। वहीं, दमकल और बचाव दल को भी अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया है। बचावकर्मी मलबे में लोगों की तलाश करने, घायलों को चिकित्सा सहायता दिलाने और क्षतिग्रस्त इमारतों की स्थिति का जायजा लेने में लगे हैं। हालांकि, पहाड़ी इलाकों में चट्टानें गिरने और सड़कों के बंद होने से अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। वहीं प्रशासन के सामने घायलों के उपचार के साथ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सुविधाएं बहाल करने की जिम्मेदारी भी है।

भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है तिब्बत का इलाका

तिब्बत और आसपास के हिमालयी क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। इस इलाके की भौगोलिक स्थिति और सक्रिय भूगर्भीय हलचल के कारण यहां भूकंप का खतरा बना रहता है। इससे पहले जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी काउंटी में 6.8 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया था। उस घटना में 120 से अधिक लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

इसी तरह, वर्ष 2010 में पड़ोसी किंघई प्रांत के युशु क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इस आपदा में हजारों लोगों की मौत हुई थी और कई लोग लापता हो गए थे। पिछली घटनाओं को देखते हुए ताजा भूकंप ने एक बार फिर क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और राहत तैयारियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

हाल की बाढ़ और भूस्खलन से भी जूझ रहा क्षेत्र

तिब्बत में भूकंप ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र हाल की बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि 26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद अचानक बाढ़ आई थी। इस घटना से मकानों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा था। कुछ जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई थीं। इस बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या कम से कम 1,400 बताई गई है, जबकि सैकड़ों लोगों के लापता होने का भी दावा किया गया है।फिलहाल, तिब्बत में आए ताजा भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य सबसे बड़ी प्राथमिकता बने हुए हैं। प्रशासन की कोशिश है कि प्रभावित इलाकों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जाए और क्षतिग्रस्त बुनियादी सुविधाओं को बहाल किया जा सके।

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