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LAC पर फिर आमने-सामने आए भारत-चीन के सैनिक, ITBP प्रमुख ने किया बड़ा खुलासा

LAC पर फिर आमने-सामने आए भारत-चीन के सैनिक, ITBP प्रमुख ने किया बड़ा खुलासा

अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर भारत और चीन के बीच सीमा सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के हालिया बयान के बाद सीमा पर सैनिकों की तैनाती और सुरक्षा तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है।

ITBP प्रमुख ने सीमा पर बदलती चुनौतियों का जिक्र करते हुए आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की बढ़ती अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि बल की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आधुनिकीकरण योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इसके तहत जवानों को नई तकनीक से लैस करने, ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप युद्धाभ्यास कराने की तैयारी है। वहीं, ITBP प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार से चीन के साथ सीमा पर मौजूदा हालात को लेकर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि जब सीमा पर आमना-सामना होने की बात सामने आ रही है, तो सरकार को इस विषय पर देश के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

ITBP महानिदेशक ने क्या कहा?

गुरूवार को राजस्थान के अलवर के सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में आयोजित हिमवीर सम्मान सम्मेलन के दौरान महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने जवानों को संबोधित करते हुए सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और बल की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है। उनके मुताबिक, कुछ क्षेत्रों में ऐसी परिस्थितियां अभी भी बनी हुई हैं। कपूर ने इन परिस्थितियों में ITBP के जवानों के योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से शौर्य कमांडो की भूमिका का उल्लेख किया और कहा कि इस नई लड़ाकू टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।

क्या हैं ITBP के शौर्य कमांडो, सीमा पर क्यों हो रही तैनाती?

ITBP ने सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष परिस्थितियों का सामना करने के लिए ‘शौर्य कमांडो’ नाम से एक नई लड़ाकू टीम तैयार की है। ITBP महानिदेशक के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ आमने-सामने की परिस्थितियों के दौरान इस टीम ने अपनी क्षमता दिखाई है।

सीमा पर तैनात जवानों को दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, कम तापमान, ऊंचाई और सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ता है। ऐसे में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इनका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सुरक्षा बलों की क्षमता को मजबूत करना है। ITBP प्रमुख ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में प्रत्येक सीमा बटालियन में इस तरह के कमांडो तैनात करने की योजना है। इससे बल की विशेष अभियान क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर खर्च होंगे करोड़ों रुपये

ITBP प्रमुख ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि अब केवल पारंपरिक सैन्य तरीकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। ड्रोन तकनीक ने निगरानी, सूचना जुटाने और सैन्य अभियानों की रणनीति को प्रभावित किया है। ऐसे में सुरक्षा बलों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करने के साथ-साथ दुश्मन के ड्रोन का मुकाबला करने की क्षमता विकसित करना भी जरूरी हो गया है।

महानिदेशक के मुताबिक, केंद्र सरकार से मिले 400 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण फंड का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने पर खर्च किया जा रहा है। इस हिसाब से करीब 280 करोड़ रुपये इन तकनीकों पर लगाए जाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, लगभग 4,000 करोड़ रुपये की एक व्यापक आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की जानकारी भी दी गई। इसमें करीब 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर खर्च करने की योजना बताई गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाना, तकनीकी रूप से सक्षम उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाना और ड्रोन से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों से निपटने की क्षमता विकसित करना है।

हर प्लाटून में ड्रोन यूनिट बनाने की तैयारी

ITBP अपनी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए हर प्लाटून में ड्रोन यूनिट स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके साथ ही ITBP अपने स्तर पर ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देने और जवानों को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण देने पर भी ध्यान दे रहा है। ताकि ड्रोन की मदद से दुर्गम इलाकों में निगरानी करना, सीमावर्ती गतिविधियों की जानकारी जुटाना और जरूरत के समय स्थितियों का आकलन करना आसान हो सकता है। वहीं, एंटी-ड्रोन सिस्टम संभावित हवाई खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने में मदद करते हैं।

गलवान जैसी परिस्थितियों के लिए ‘स्ट्राइक’ प्रशिक्षण कार्यक्रम

ITBP ने जवानों को कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘स्ट्राइक’ नाम का एक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया है। महानिदेशक के मुताबिक, इस कार्यक्रम का लक्ष्य जवानों को गलवान जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करना है। उन्होंने बताया कि 2027 के अंत तक पूरे बल को इस प्रशिक्षण से गुजारने की योजना है। इस पहल के तहत जवानों की तैयारी को बदलती परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही, एक अलग ‘स्ट्राइक कॉर्प्स’ तैयार करने की योजना का भी उल्लेख किया गया है।

ITBP की भूमिका क्यों है अहम?

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को भारत-चीन युद्ध के बाद की गई थी। यह बल भारत-चीन सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी निभाता है। ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में तैनात ITBP के जवानों को कठिन मौसम, दुर्गम रास्तों और सीमित ऑक्सीजन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

अरुणाचल प्रदेश भारत के पूर्वोत्तर में स्थित एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य है। यहां भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए विभिन्न स्तरों पर बातचीत भी होती रही है। ऐसे में सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की तैयारी, आधुनिक निगरानी तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण माना जाता है।

कांग्रेस ने चीन सीमा पर सरकार से मांगा जवाब

ITBP महानिदेशक के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार से चीन सीमा की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि जब ITBP प्रमुख अरुणाचल प्रदेश में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की घटनाओं का उल्लेख कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर देश को जानकारी देनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि चीन के साथ सीमा पर होने वाली घटनाओं को लेकर सरकार को अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए। पार्टी लंबे समय से इस विषय पर सरकार से जवाब मांगती रही है।

वहीं, इस पूरे मामले में ITBP प्रमुख के बयान का मुख्य केंद्र सीमा पर जवानों की तैयारियां, शौर्य कमांडो की भूमिका और आधुनिक तकनीक के जरिए बल की क्षमताओं को मजबूत करना रहा। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार सीमा पर मौजूदा परिस्थितियों और आधुनिकीकरण योजनाओं को लेकर आगे क्या जानकारी देती है।

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