Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार, 14 अक्टूबर को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया गया। लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन संघर्ष को प्रेरणादायक बताते हुए युवाओं को किताबें पढ़ने, विपरीत परिस्थितियों का सामना करने और सोशल मीडिया पर समय बिताने के बजाय अपने भविष्य को बेहतर बनाने की सलाह दी।
यह पुस्तक रामनाथ कोविन्द के व्यक्तिगत जीवन, उनके संघर्षों और सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को सामने लाती है। इसका अंग्रेजी संस्करण ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ 12 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नई दिल्ली में जारी किया गया था। अब इसका हिंदी रूपांतरण पाठकों के सामने आया है।

योगी ने रामनाथ कोविन्द को दी बधाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति को उनकी आत्मकथा के हिंदी संस्करण के विमोचन पर बधाई दी। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश की जनता की ओर से उनका अभिनंदन करते हुए कहा कि रामनाथ कोविन्द का जीवन संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की प्रेरक मिसाल है।
योगी ने कहा कि रामनाथ कोविन्द का उत्तर प्रदेश से विशेष जुड़ाव रहा है। यह प्रदेश उनकी जन्मभूमि होने के साथ-साथ उनकी कर्मभूमि भी है। उनके जीवन की यात्रा बताती है कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की सफलता का रास्ता बंद नहीं कर सकतीं। यदि व्यक्ति में आगे बढ़ने का संकल्प हो, तो अभाव भी उसकी राह में स्थायी बाधा नहीं बनते।
संघर्ष से ही मिलती है सफलता की राह
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जीवन की चुनौतियों का सामना करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सफलता केवल अनुकूल परिस्थितियों में आगे बढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि असहज और कठिन समय में डटे रहने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। उनके मुताबिक, परिस्थितियां अच्छी हों तो उनका इस्तेमाल समाज के कल्याण और विकास के लिए करना चाहिए। वहीं, जब समय प्रतिकूल हो, तब हिम्मत हारकर पीछे हटने के बजाय चुनौतियों का सामना करना चाहिए। योगी ने युवाओं को संदेश दिया कि संघर्ष से बचने की प्रवृत्ति उन्हें अपने लक्ष्य से दूर कर सकती है, जबकि धैर्य और मेहनत उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देते हैं।
स्मार्टफोन से समय निकालकर किताबें पढ़ें युवा
आज के डिजिटल दौर में युवाओं की आदतों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोग प्रतिदिन कई घंटे मोबाइल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं। यदि इसी समय में से रोजाना एक-दो घंटे पढ़ने के लिए निकाले जाएं, तो यह उनके ज्ञान और व्यक्तित्व के विकास में उपयोगी साबित हो सकता है।
योगी ने पुस्तकों को जीवन का महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बताते हुए युवाओं से पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स जुटाने की कोशिश के बजाय वास्तविक जीवन में अपनी क्षमताएं बढ़ाने पर ध्यान देने की बात कही। उनके संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सीमित और उद्देश्यपूर्ण हो, ताकि पढ़ाई, कौशल और व्यक्तिगत विकास के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने की सुविधाओं का जिक्र करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, प्रदेश में बनाए गए 57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था की गई है, जहां ग्रामीण बच्चों को अध्ययन का अवसर मिल रहा है। उन्होंने पुस्तकालयों को ज्ञान और बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बताया। गांवों में पढ़ने की सुविधाएं उपलब्ध होने से बच्चों को अपने आसपास ही अध्ययन का बेहतर वातावरण मिल सकता है। इससे शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने और विद्यार्थियों को नई जानकारियों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
युवाओं के लिए क्या है संदेश?
रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा के हिंदी संस्करण के विमोचन के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन मुख्य रूप से संघर्ष, अध्ययन और आत्मविकास पर केंद्रित रहा। उन्होंने युवाओं को समझाया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल अवसरों का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है; मेहनत, पढ़ने की आदत और मुश्किलों से जूझने का जज्बा भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, कार्यक्रम में पुस्तक विमोचन के साथ युवाओं को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि सफलता का रास्ता ज्ञान, निरंतर प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति से होकर गुजरता है। यदि युवा सोशल मीडिया के आकर्षण से समय निकालकर पुस्तकों, शिक्षा और अपने कौशल पर ध्यान दें, तो वे न केवल अपना भविष्य बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज के विकास में भी सार्थक योगदान दे सकते हैं।

