Sajjan Kumar passes away: कांग्रेस के पूर्व सांसद और नेता सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। निधन के समय सज्जन कुमार 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। सज्जन कुमार लंबे समय तक दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। हालांकि 1984 के दंगों से जुड़े अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालतों के इन फैसलों के बाद उनके राजनीतिक जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा इन मामलों के इर्द-गिर्द ही रहा।
कौन हैं सज्ज्न कुमार?
सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली के एक जाट परिवार में हुआ था। उन्होंने मैट्रिक तक पढ़ाई की थी। राजनीति में सक्रिय होने से पहले वह अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए चाय की दुकान और बेकरी चलाते थे। उन्होंने वर्ष 1977 में दिल्ली नगर निगम के पार्षद के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। इसके बाद वह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने और धीरे-धीरे पार्टी में अपनी मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई। कांग्रेस के टिकट पर सज्जन कुमार ने 1980 में बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और 7वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने गए। इसके बाद 1991 में भी उन्होंने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की। वर्ष 2004 में उन्होंने एक बार फिर बाहरी दिल्ली सीट से लोकसभा चुनाव जीता। इस चुनाव में उन्हें 85 लाख से अधिक वोट मिलने का दावा किया गया था। लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहने के कारण दिल्ली की राजनीति में उनका एक प्रभावशाली राजनीतिक सफर रहा।
सज्जन कुमार पर क्या थे आरोप?
साल 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख-विरोधी हिंसा भड़क उठी। बताया जाता है कि इन दंगों में 3 से 5 हजार लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामलों में सज्जन कुमार के खिलाफ भी कई मुकदमे दर्ज किए गए,और इन मामलों की कानूनी प्रक्रिया कई वर्षों तक चली। अलग-अलग मुकदमों में उन्हें अदालतों से राहत भी मिली, लेकिन कुछ मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें उम्रकैद की सजा भुगतनी पड़ी। यही वजह रही कि उनके खिलाफ चलने वाले मुकदमे उनके राजनीतिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन गए।
सज्जन कुमार के खिलाफ दर्ज मामलों में सबसे चर्चित मामला दिल्ली की पालम कॉलोनी के राज नगर पार्ट-1 से जुड़ा था। जिसमें दिसंबर 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत के 2013 के फैसले को पलटते हुए उन्हें पांच सिखों की हत्या और एक गुरूद्वारे को जलाने के मामले में दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने आपराधिक साजिश और हिंसा भड़काने से जुड़े आरोपों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी इसके अलावा अदालत ने 1984 की हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध भी बताया था।
इसके बाद फरवरी 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार को सरस्वती विहार मामले में भी दोषी ठहराया था। यह मामला उस हिंसक भीड़ से जुड़ा था, जिसमें जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह को जिंदा जला दिया गया था। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
फिर जनवरी 2026 में एक ऐसा मोड़ आया जब विकासपुरी और जनकपुरी से जुड़े मामले में सज्जन कुमार को बरी कर दिया गया था,और अदालत ने कहा था- कि उनके घटनास्थल पर मौजूद होने या गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा होने को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। हालांकि, इससे उनकी जेल से रिहाई नहीं हुई, क्योंकि दो अन्य मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा मिल चुकी थी। इस तरह से साल 2018 से सज्जन कुमार तिहाड़ जेल में सजा काट रहे थे। अप्रैल 2026 में उन्होंने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगी थी,लेकिन कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी और आज उनका 80 साल की उम्र में निधन हो गया है।