9 महीने बाद लाल किला ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा, अल-कायदा ने रची थी साजिश,सेल के जरिए करता है काम: UN रिपोर्ट

9 महीने बाद लाल किला ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा, अल-कायदा ने रची थी साजिश,सेल के जरिए करता है काम: UN रिपोर्ट

Delhi Red Fort Blast: दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए धमाके को लेकर जांच में अब एक अहम खुलासा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की प्रतिबंध समिति से जुड़ी निगरानी टीम की ताजा रिपोर्ट में इस हमले का संबंध अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से बताया गया है। रिपोर्ट में AQIS के बदलते तौर-तरीकों और छोटे-छोटे सेल के जरिए गतिविधियों को अंजाम देने की रणनीति पर भी चिंता जताई गई है।

यह खुलासा ऐसे वक्त हुआ है, जब भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) लाल किला विस्फोट मामले की गहन जांच कर रही है। एजेंसी ने मई 2026 में मामले में करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। NIA के मुताबिक, जांच के दौरान कथित आतंकी मॉड्यूल, उसके नेटवर्क और संपर्कों से जुड़े कई अहम सुराग सामने आए हैं। अब संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने इस मामले की जांच को एक नया अंतरराष्ट्रीय आयाम दे दिया है।

लाल किला धमाके में AQIS का हाथ

UNSC की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की यह रिपोर्ट सोमवार को जारी की गई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC की 1267 प्रतिबंध समिति के लिए 38वीं निगरानी रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें AQIS यानी अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट की पूरी गतिविधियों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट में नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले पर हुए हमले के पीछे AQIS को जिम्मेदार ठहराया गया है। साथ ही, अल-कायदा के काम करने के बदलते तौर-तरीकों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह संगठन अब पहले की तरह किसी एक बड़े और केंद्रीकृत ढांचे के रूप में काम करने के बजाय छोटे-छोटे बिखरे हुए सेल, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क के जरिए संचालित होने की रणनीति अपना रहा है।

इस बदलाव से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संगठन की गतिविधियों और उसके नेटवर्क की पहचान करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। क्योंकि छोटे समूहों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क सीमित होने के कारण पूरे नेटवर्क की पहचान और निगरानी मुश्किल हो सकती है। इससे पहले आई UNSC की 37वीं रिपोर्ट में एक सदस्य देश ने इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का हाथ बताया था। यानी, इस हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की लगातार दो रिपोर्टों में दो अलग-अलग आतंकी संगठनों के नाम सामने आए हैं।

दक्षिण एशिया में AQIS के विस्तार पर UN की नजर

संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया है कि AQIS की गतिविधियां केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया के कई अन्य हिस्सों में भी यह संगठन अपना विस्तार कर रहा है। इस रिपोर्ट में अफगानिस्तान में AQIS की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए बांग्लादेश में संगठन के संभावित विस्तार को लेकर भी चिंता जताई जाहिर की है। निगरानी टीम के मुताबिक, AQIS बांग्लादेश में अपने प्रभाव को बढ़ाने और छोटे-छोटे आतंकी सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। जोकि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से काफी चिंता का विषय है।

गौरतलब है कि 10 नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास चलती कार में धमाका हुआ था, जिसने देश की राजधानी को झकझोर कर रख दिया था। यह धमाका लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच हुआ था, जिसमें करीब 15 लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। वहीं हमले के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी थी। बाद में यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया था। जहां जांच के दौरान फोरेंसिक जांच, डीएनए प्रोफाइलिंग, वॉयस एनालिसिस और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का इस्तेमाल किया गया।

वहीं, NIA की चार्जशीट के मुताबिक जांच में दिल्ली, फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर से जुड़े साक्ष्यों की भी पड़ताल की गई। इस दौरान हमले से जुड़े एक कथित आतंकी मॉड्यूल की जानकारी भी सामने आई थी। इसके अलावा, मई 2026 में NIA द्वारा दाखिल 7,500 पन्नों की चार्जशीट में 10 आरोपियों के नाम शामिल किए गए थे, जिनका इस हमले से कथित कनेक्शन सामने आया था

फिलहाल लाल किला हमले से जुड़े इस मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया दोनों जारी हैं। NIA की चार्जशीट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में आगे की कार्रवाई होगी। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट दक्षिण एशिया में AQIS और उससे जुड़े नेटवर्क की गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और आकलन का एक अहम हिस्सा है।

 

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