दिल्ली में दो महिला पत्रकारों से कथित मारपीट का मामला, CM से सवाल पूछने के बाद हिरासत में लेने का आरोप, जानिए पूरा विवाद

दिल्ली में दो महिला पत्रकारों से कथित मारपीट का मामला, CM से सवाल पूछने के बाद हिरासत में लेने का आरोप, जानिए पूरा विवाद

दिल्ली के साकेत इलाके में दो महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है। पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने दिल्ली पुलिस पर उन्हें हिरासत में लेने, मारपीट करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों पत्रकार साकेत स्थित मैक्स अस्पताल की नई बिल्डिंग के उद्घाटन कार्यक्रम को कवर करने पहुंची थीं। आरोप है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश के बाद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी की और उन्हें साकेत थाने ले जाया गया।

इस पूरे मामले का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल है। इस वीडियो में शाहीन खान अपने शरीर पर चोट के निशान दिखाती नजर आ रही हैं और पुलिस पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगा रही हैं। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रहे चोटों के निशान किस परिस्थिति में लगे, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, साकेत स्थित मैक्स अस्पताल की नई बिल्डिंग का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में किया था। इसी कार्यक्रम की रिपोर्टिंग के लिए स्वतंत्र पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान पहुंची थीं। शाहीन खान के मुताबिक, दोनों कार्यक्रम स्थल से काफी दूर थीं। इस दौरान उन्होंने इलाके में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा साफ-सफाई देखी। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के एक कटआउट के सामने वीडियो बनाया। शाहीन का दावा है कि इस वीडियो में वह इलाके की सफाई और वीआईपी दौरे के दौरान की गई व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठा रही थीं।

शाहीन ने आरोप लगाया कि वीडियो बनाने के दौरान कुछ पुलिस अधिकारी उनके पास आए और उन्हें धमकाते हुए फोन छीनने की कोशिश की। उनका कहना है कि जब उन्होंने कैमरे के सामने इसका विरोध किया तो महिला पुलिसकर्मियों को बुलाया गया। इसके बाद शाहीन और नफीसा को कथित तौर पर पुलिस थाने ले गई। शाहीन का आरोप है कि थाने में दोनों के साथ मारपीट की गई।

पत्रकार शाहीन ने लगाए गंभीर आरोप

इस वायरल वीडियो में शाहीन खान पुलिस पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाती नजर आ रही हैं। उनका दावा है कि पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ सुनने के बाद कथित तौर पर उनके साथ बदसलूकी की गई। उन्होंने अपनी धार्मिक पहचान के आधार पर प्रताड़ित किए जाने का भी आरोप लगाया है। शाहीन का यह भी कहना है कि थाने में उन्होंने मेडिकल सहायता मांगी, लेकिन तत्काल मदद नहीं मिली। उनके मुताबिक, 112 पर कॉल करने के बाद उन्हें चिकित्सा सहायता मिली और सरकारी अस्पताल में मेडिकल कराया गया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। खास तौर पर वीडियो में दिखाई दे रहे चोटों के निशान पुलिस कार्रवाई के दौरान ही लगे या किसी अन्य परिस्थिति में, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

सौरभ भारद्वाज ने क्या कहा?

मामला सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस और सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में घटना को शर्मनाक बताते हुए महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट की आलोचना की। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने पर पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए और मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

वहीं आप नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- कि शाहीन खान पत्रकार होने के साथ उनके विधानसभा क्षेत्र की निवासी भी हैं और इस घटना से वह स्तब्ध हैं। इसके अलावा उन्होंने उपराज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने और कथित तौर पर शामिल पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। साथ ही उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की हैं।

कांग्रेस ने भी पुलिस पर उठाए सवाल

वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस घटना को लेकर दिल्ली पुलिस और बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि पत्रकार शाहीन खान ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछा, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और कथित तौर पर मारपीट की गई। कांग्रेस ने पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की निंदा करते हुए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पत्रकार संगठनों ने भी जताई नाराजगी

इस पूरे मामले ने पत्रकार संगठनों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, प्रेस एसोसिएशन और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने कथित पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी कहा कि दोनों पत्रकार अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम की रिपोर्टिंग कर रही थीं और मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

पुलिस ने क्या कहा?

फिलहाल इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। साकेत थाना प्रभारी दिनेश कुमार से जब मामले को लेकर संपर्क किया गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ऐसे में फिलहाल मामले में पत्रकारों की ओर से लगाए गए आरोप और उनके द्वारा दी गई शिकायत ही सामने है। पुलिस की ओर से आधिकारिक जांच, घटना का पूरा विवरण या आरोपों पर कोई विस्तृत जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उस दिन वास्तव में क्या हुआ था।

 

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