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नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर ट्रम्प का फूटा गुस्सा, बोले- ‘नॉर्वे ने कभी न मिटने वाला दाग लगा लिया’

नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर ट्रम्प का फूटा गुस्सा, बोले- ‘नॉर्वे ने कभी न मिटने वाला दाग लगा लिया’

Nobel Prize Controversy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपने बयान के कारण चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने पुरस्कार नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर करते हुए नॉर्वे पर निशाना साधा है। ट्रम्प का कहना है कि उन्होंने दुनिया में कई बड़े संघर्षों को रोकने में भूमिका निभाई, इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य नहीं समझा गया। उन्होंने इस फैसले को शर्मनाक और अपमानजनक बताते हुए कहा कि हर युद्ध को रुकवाने के लिए उन्हें अलग-अलग पुरस्कार मिलना चाहिए था।

ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्धों को रोकने में मदद की है और इस उपलब्धि के लिए उन्हें आठ बार नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि पुरस्कार नहीं देकर नॉर्वे ने अपने ऊपर ऐसा दाग लगा लिया है, जो कभी नहीं मिटेगा। इस साल नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका की पूर्व संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लै को दिया गया है। ट्रम्प ने पुरस्कार विजेता का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें कोई नहीं जानता।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष रोकने का फिर किया दावा

नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ट्रम्प ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच युद्ध रुकवाया था। ट्रम्प के मुताबिक, परमाणु हथियार रखने वाले भारत और पाकिस्तान को संघर्ष से दूर करके उन्होंने पांच करोड़ लोगों की जान बचाई। हालांकि, भारत पहले भी ट्रम्प के भारत-पाकिस्तान संघर्ष में मध्यस्थता करने के दावों को खारिज करता रहा है। भारत का कहना रहा है कि पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम का फैसला दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क के जरिए हुआ था।

ट्रम्प ने अपने बयान में ईरान और रूस-यूक्रेन युद्ध का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह इन संघर्षों को खत्म कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका दावा है कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने में भी अहम भूमिका निभाई है। ट्रम्प के अनुसार, यदि ऐसा नहीं होता तो मिडिल ईस्ट के साथ यूरोप और अमेरिका तक गंभीर तबाही का खतरा पैदा हो सकता था।

उन्होंने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इतिहास में किसी भी दूसरे व्यक्ति से ज्यादा लोगों की जान बचाई है। ट्रम्प का मानना है कि उनके प्रयासों को देखते हुए नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिका को मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका इसे कभी नहीं भूलेगा।

2018 से ही नोबेल पुरस्कार को लेकर चर्चा में हैं ट्रम्प

डोनाल्ड ट्रम्प के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कोई नई बात नहीं है। वह कई वर्षों से अलग-अलग मौकों पर इस पुरस्कार का जिक्र करते रहे हैं। अक्टूबर 2018 में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि शायद उन्हें कभी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा, जबकि वह उत्तर कोरिया और सीरिया जैसे मुद्दों पर शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। फरवरी 2019 में ट्रम्प ने अपनी दावेदारी को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था। हालांकि, उस समय भी उन्होंने पुरस्कार जीतने को लेकर संदेह जताया था।

इसी साल एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए ट्रम्प ने कहा था कि अगर नोबेल शांति पुरस्कार निष्पक्ष तरीके से दिया जाए तो उन्हें कई उपलब्धियों के लिए यह सम्मान मिल सकता है। इसके बाद 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी उन्होंने पुरस्कार का मुद्दा उठाया था। ट्रम्प ने उस समय पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से अपनी तुलना करते हुए सवाल किया था कि अगर ओबामा को नोबेल शांति पुरस्कार मिल सकता है, तो उन्हें क्यों नहीं।

बराक ओबामा को मिले पुरस्कार पर भी उठा चुके हैं सवाल

नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रम्प की नाराजगी का एक बड़ा कारण बराक ओबामा को मिला सम्मान भी रहा है। ओबामा को साल 2009 में अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के शुरुआती महीनों में ही नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। उस समय वह राष्ट्रपति पद पर अपना पहला साल पूरा भी नहीं कर पाए थे।

ट्रम्प ने ओबामा को पुरस्कार दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें महज आठ महीने में यह सम्मान मिल गया, जबकि उनके मुताबिक ओबामा ने ऐसा कुछ नहीं किया था जिसके लिए उन्हें पुरस्कार दिया जाना चाहिए। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि ओबामा को खुद नहीं पता होगा कि उन्हें यह सम्मान किस वजह से मिला। हालांकि, नोबेल समिति ने ओबामा को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और देशों के बीच सहयोग मजबूत करने के प्रयासों के लिए चुना था। समिति ने परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया की दिशा में उनके प्रयासों का भी उल्लेख किया था। इसके बावजूद ओबामा को इतने कम समय में पुरस्कार दिए जाने का फैसला उस समय चर्चा और विवाद का विषय बना रहा।

अब तक चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों को मिल चुका है नोबेल शांति पुरस्कार

इतिहास में अब तक चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों को नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है। इनमें थियोडोर रूजवेल्ट, वुडरो विल्सन, जिमी कार्टर और बराक ओबामा शामिल हैं। इन राष्ट्रपतियों को अलग-अलग समय पर शांति, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।

ट्रम्प भी लंबे समय से इस सूची में शामिल होने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं। उनके ताजा बयान से एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोकने के दावों और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए तय मानदंडों के बीच किस तरह का संबंध है। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए किसी व्यक्ति या संगठन का चयन नॉर्वे की नोबेल समिति करती है। यह सम्मान शांति स्थापित करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और संघर्षों के समाधान की दिशा में किए गए प्रयासों के आधार पर दिया जाता है।

नवी पिल्लै ने ट्रंप पर मजाकिया अंदाज में कसा तंज

नोबेल शांति पुरस्कार 2026 की विजेता नवनीतम नवी पिल्लै ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हल्के-फुल्के अंदाज में निशाना साधा। पुरस्कार की घोषणा के बाद जब वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की, तो पिल्लै ने मुस्कुराते हुए कहा कि अगर तालियां थोड़ी और देर तक बजती रहीं, तो शायद वह अपना पुरस्कार ट्रंप के साथ साझा कर सकती हैं। उनकी इस टिप्पणी को ट्रंप के नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा से जोड़कर देखा जा रहा है।

नवी पिल्लै का यह मजाक पिछले साल की उस घटना की याद दिलाता है, जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल पदक सौंप दिया था। मचाडो को वर्ष 2025 में लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों के चलते नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

पुरस्कार मिलने के बाद मचाडो ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी और उन्हें अपना स्वर्ण पदक भेंट किया था। हालांकि, पदक सौंपने के बावजूद नोबेल पुरस्कार के आधिकारिक विजेता का दर्जा ट्रंप को नहीं मिला। यह सम्मान मचाडो के नाम पर ही रहा। ऐसे में नवी पिल्लै की टिप्पणी ने एक बार फिर ट्रंप और नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चल रही चर्चाओं को हवा दे दी है। उनकी इस चुटीली प्रतिक्रिया के बाद पुरस्कार को लेकर अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।

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