2027 चुनाव से पहले BJP का 4C प्लान, विनोद तावड़े ने बताया पूरा रोडमैप, अखिलेश के PDA पर भी साधा निशाना

2027 चुनाव से पहले BJP का 4C प्लान, विनोद तावड़े ने बताया पूरा रोडमैप, अखिलेश के PDA पर भी साधा निशाना

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीजेपी के नए प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर मंथन किया। इस दौरान संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, सभी जातीय समीकरणों को साधने और कमजोर सीटों पर विशेष ध्यान देने को लेकर पार्टी नेताओं को दिशा-निर्देश दिए गए।

विनोद तावड़े का यह लखनऊ दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों की समीक्षा के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रही है। तावड़े ने अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कोर कमेटी के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया।

4C के जरिए चुनावी रणनीति को मजबूत करने की तैयारी

भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन के स्तर पर 4C फॉर्मूले पर फोकस करने की रणनीति बनाई है। इसमें Coordination (समन्वय), Cadre  (कार्यकर्ता), Caste  (जातीय समीकरण) और Candidature  (उम्मीदवार चयन) को प्रमुखता दी जा रही है। इसके अलावा पार्टी की कोशिश है कि चुनाव से पहले संगठन के अलग-अलग स्तरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। इसके साथ ही बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और युवाओं को संगठन से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है क्योंकि बीजेपी का मानना है कि मजबूत बूथ मैनेजमेंट और सक्रिय कैडर चुनावी मुकाबले में पार्टी की स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।

करीब 100 कमजोर विधानसभा सीटों पर खास नजर

बीजेपी की इस चुनावी रणनीति में उन विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। जिनमें ऐसी करीब 100 विधानसभा सीटों को चिह्नित किया गया है। इन सीटों पर संगठन की स्थिति, बूथ स्तर की कमियों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का आकलन किया जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव से पहले इन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत किया जाए, ताकि 2027 के चुनाव में पिछली कमियों को दोहराने से बचा जा सके।

जातीय समीकरणों को साधने पर तावड़े का फोकस

यूपी की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। ऐसे में बीजेपी ने 2027 के लिए सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने पर भी अपना ध्यान केंद्रित किया है। लखनऊ की इस बैठक में विनोद तावड़े ने पार्टी के नेताओं को सभी जातियों और सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने का संदेश दिया हैं। बीजेपी की इस रणनीति को समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले की काट के तौर पर भी देखा जा रहा है।

अखिलेश के PDA पर विनोद तावड़े का पलटवार

बीजेपी प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर भी निशाना साधा। उन्होंने PDA की नई व्याख्या करते हुए इसे पराया धन अपना’ बताया। तावड़े ने कहा- कि PDA और SP का मतलब ‘पराया धन अपना’ है और NDA ऐसा कभी नहीं होने देगा। बीजेपी नेता के इस बयान को समाजवादी पार्टी के सामाजिक गठबंधन वाले राजनीतिक नैरेटिव के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।

बता दें कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के सामने सबसे बड़ा सवाल पार्टी के चुनावी चेहरे को लेकर था। जिसे विनोद तावड़े के बयान के बाद इस मुद्दे पर तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है क्योंकि तावड़े ने स्पष्ट किया कि बीजेपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर ही 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी।  यानी चुनावी रणनीति में योगी आदित्यनाथ राज्य सरकार के चेहरे के तौर पर प्रमुख भूमिका में रहेंगे, जबकि संगठन स्तर पर बीजेपी अपने वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की टीम के साथ चुनावी अभियान को आगे बढ़ाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन समेत बीजेपी के बड़े नेताओं के यूपी दौरे भी चुनावी तैयारियों का हिस्सा होंगे।

कुल मिलाकर विनोद तावड़े के लखनऊ दौरे से बीजेपी की 2027 की चुनावी रणनीति के कई अहम संकेत सामने आए हैं। पार्टी जहां एक तरफ बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने पर भी जोर दे रही है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में BJP और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की भी बड़ी जंग बनता दिखाई दे रहा है।

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