Technology : आप दुकान पर पहुंचे और पेमेंट के लिए न जेब से मोबाइल निकालना पड़े, न QR कोड स्कैन करना पड़े और न ही PIN डालने की जरूरत हो। बस मशीन के सामने अपनी हथेली दिखाई और कुछ ही सेकेंड में पेमेंट पूरा! सुनने में ये किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन चीन में ऐसी टेक्नोलॉजी हकीकत बन चुकी है। यहां बायोमेट्रिक पाम स्कैन के जरिए लोग सिर्फ अपनी हथेली दिखाकर पेमेंट कर रहे हैं। आखिर कैसे काम करती है ये टेक्नोलॉजी और क्या आने वाले समय में आपका हाथ ही आपका डिजिटल वॉलेट बन जाएगा?
भारत में UPI के जरिए पेमेंट करने के लिए आमतौर पर स्मार्टफोन से QR कोड स्कैन किया जाता है। लेकिन चीन में पेमेंट का एक ऐसा सिस्टम भी मौजूद है, जिसमें यूजर की हथेली को ही पेमेंट की पहचान बना दिया गया है। इसे Palm Payment या Palm Scan Payment कहा जाता है।
कैसे काम करता है Palm Payment?
इस तकनीक में एक खास स्कैनर के सामने हथेली दिखानी होती है। सिस्टम हथेली की बाहरी बनावट के साथ-साथ हथेली और कलाई के अंदर मौजूद नसों के पैटर्न को भी पहचान सकता है। इसके लिए बायोमेट्रिक स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि पहली बार इस्तेमाल से पहले यूजर को अपने palm scan रजिस्टर करना होता है। इसके बाद पेमेंट अकाउंट या बैंक कार्ड को इस बायोमेट्रिक पहचान से लिंक किया जाता है। रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद संबंधित मशीन पर हथेली दिखाकर भुगतान किया जा सकता है।
WeChat Pay ने शुरू की थी सुविधा
चीन में Tencent के WeChat Pay ने Palm Payment सिस्टम को 2023 में लॉन्च किया था। शुरुआती इस्तेमाल के बाद इस तकनीक को रिटेल स्टोर्स, ट्रांसपोर्ट, जिम, मॉल, रेलवे स्टेशन, ऑफिस और कैंपस जैसे स्थानों पर भी इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस सिस्टम की खासियत यह है कि पेमेंट के समय यूजर को फोन या QR कोड की जरूरत नहीं पड़ती। हथेली की पहचान होने के बाद उससे जुड़े पेमेंट आकाउंट से ट्रांजैक्शन पूरा किया जा सकता है।
क्या भारत में भी हो सकती है ऐसी टेक्नोलॉजी?
Palm Biometric Payment सिर्फ चीन तक सीमित नहीं है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी कंपनियां हथेली और नसों की पहचान वाली पेमेंट टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं। Tencent, Visa और Mastercard जैसी कंपनियों ने भी Palm Biometric Payment से जुड़े प्रयोग और प्रोजेक्ट किए हैं। यानी आने वाले समय में पेमेंट के लिए मोबाइल, कार्ड और QRकोड के अलावा बायोमेट्रिक पहचान भी एक विकल्प बन सकती है। हालांकि ऐसे तकनीक के साथ यूजर की बायोमेट्रिक जानकारी किक सुरक्षा और प्राइवेसी भी अहम मुद्दे हैं।