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Delhi-NCR में GRAP-1 लागू, कोयले से तंदूर जलाने पर रोक, जानें किन चीजों पर रहेगी पाबंदी और क्या हैं नियम

Delhi-NCR में GRAP-1 लागू, कोयले से तंदूर जलाने पर रोक, जानें किन चीजों पर रहेगी पाबंदी और क्या हैं नियम

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ ही एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ गई है। बुधवार सुबह दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 233 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। हवा की गुणवत्ता में गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इसके तहत प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण करने, सड़कों से उड़ने वाली धूल कम करने और निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

GRAP-1 लागू होने के बाद प्रशासन की निगरानी बढ़ जाएगी। होटल, रेस्तरां और खुले में भोजन बनाने वाले प्रतिष्ठानों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक जैसे उपायों के साथ कचरा जलाने और निर्माण कार्यों से फैलने वाली धूल पर भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि GRAP-1 क्या है, इसके तहत किन गतिविधियों पर पाबंदी रहती है और AQI का कौन-सा स्तर कितना खतरनाक माना जाता है।

GRAP-1 के तहत किन चीजों पर रहेगी पाबंदी?

GRAP का पहला चरण लागू होने पर प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए संबंधित विभागों को निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन कराना होता है। इसका उद्देश्य प्रदूषण को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करना और हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है।

कोयले और लकड़ी से तंदूर जलाने पर रोक

GRAP-1 के तहत होटल, रेस्तरां और खुले भोजनालयों में कोयले या लकड़ी का इस्तेमाल करके तंदूर जलाने पर प्रतिबंध रहता है। ऐसे प्रतिष्ठानों को खाना पकाने के लिए LPG, बिजली या अन्य अनुमत स्वच्छ ईंधन वाले विकल्पों का इस्तेमाल करना होता है।

निर्माण स्थलों पर धूल फैलाने के खिलाफ कार्रवाई

निर्माण और तोड़फोड़ के दौरान उड़ने वाली धूल वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। इसलिए निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करने के उपाय करना जरूरी है। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्थलों पर संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं। निर्माण सामग्री को खुले में छोड़ने से बचना और उसे ढककर रखना भी जरूरी है।

सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव

सड़कों पर जमा धूल दोबारा हवा में न फैले, इसके लिए मैकेनिकल स्वीपिंग यानी मशीनों से सफाई और नियमित पानी के छिड़काव को बढ़ाया जाता है। जरूरत के अनुसार एंटी-स्मॉग गन जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। नगर निकायों को सड़कों और निर्माण स्थलों के आसपास धूल नियंत्रण के उपाय प्रभावी ढंग से लागू करने होते हैं।

खुले में कचरा जलाने पर रोक

कचरे, पत्तियों और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को खुले में जलाने से हवा में हानिकारक प्रदूषक फैलते हैं। GRAP-1 के तहत खुले में कचरा जलाने पर रोक है। संबंधित विभागों को ऐसी गतिविधियों की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाते हैं।

डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर नियंत्रण

प्रदूषण कम करने के लिए डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर निर्धारित नियमों के अनुसार नियंत्रण किया जाता है। हालांकि, हर स्थिति में सभी डीजल जनरेटर पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए। आपातकालीन जरूरतों और लागू नियमों के तहत मिलने वाली छूट के अनुसार इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी

वाहनों से निकलने वाला धुआं भी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल है। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच पर जोर दिया जाता है। वैध PUC प्रमाणपत्र रखना वाहन चालकों के लिए जरूरी है। बिना वैध प्रमाणपत्र वाले वाहनों के खिलाफ लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

क्या GRAP-1 लागू होने से निर्माण कार्य बंद हो जाएंगे?

GRAP-1 लागू होने का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली-एनसीआर में सभी निर्माण कार्यों पर अपने आप पूर्ण प्रतिबंध लग गया है। पहले चरण में मुख्य रूप से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सामग्री को ढककर रखने, मलबे का उचित निपटान और निर्धारित पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है। यदि किसी निर्माण स्थल पर नियमों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं।

क्या होता है GRAP?

ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तैयार की गई चरणबद्ध कार्ययोजना है। इसे वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) लागू कराता है। इसके तहत हवा की गुणवत्ता और प्रदूषण के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग चरणों में नियंत्रण के उपाय किए जाते हैं।

GRAP के चार चरण हैं। प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ पाबंदियां और सख्त होती जाती हैं। पहले चरण में प्रदूषण को नियंत्रित करने के शुरुआती उपाय किए जाते हैं, जबकि आगे के चरणों में स्थिति के अनुसार अतिरिक्त प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।

GRAP-1: AQI 201 से 300 के बीच होने पर, यानी खराब श्रेणी में।

GRAP-2: AQI 301 से 400 के बीच होने पर, यानी बहुत खराब श्रेणी में।

GRAP-3: AQI 401 से 450 के बीच होने पर, यानी गंभीर श्रेणी में।

GRAP-4: AQI 450 से ऊपर होने पर, यानी गंभीर से अधिक प्रदूषण वाली श्रेणी में।

इन चरणों के लागू होने का निर्णय केवल किसी एक समय के AQI आंकड़े के आधार पर नहीं, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया, वायु गुणवत्ता के पूर्वानुमान और संबंधित आयोग के आदेशों के अनुसार लिया जाता है। पहले के चरणों के उपाय भी अगले चरण लागू होने पर जारी रहते हैं।

AQI का पैमाना क्या है?

एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के माध्यम से हवा में मौजूद प्रदूषण के स्तर को समझा जाता है। इसकी मदद से यह पता लगाया जा सकता है कि हवा की गुणवत्ता कितनी अच्छी या खराब है और प्रदूषण का स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के अनुसार AQI की श्रेणियां इस प्रकार हैं:

0 से 50: अच्छा

51 से 100: संतोषजनक

101 से 200: मध्यम

201 से 300: खराब

301 से 400: बहुत खराब

401 से 500: गंभीर

दिल्ली में बुधवार  को AQI 233 दर्ज किया गया था, जो खराब श्रेणी में आता है। इस स्तर पर संवेदनशील लोगों, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से स्वस्थ लोगों को भी परेशानी हो सकती है।

प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के दौरान लोगों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बाहर रहने से बचना चाहिए। संभव हो तो निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें। खुले में कचरा न जलाएं इसके अलावा बाहर निकलते समय प्रदूषण का ताजा स्तर जांचना भी उपयोगी है। यदि आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी हो, तो प्रदूषण के संपर्क को कम करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें। फिलहाल GRAP-1 के तहत प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण और धूल कम करने के उपायों पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है या प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है, इसके आधार पर प्रशासन आगे के कदम उठा सकता है।

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