देश की राजधानी दिल्ली में गांधी जयंती के मौके पर शुक्रवार को कई इलाकों में सामान्य दिनों की तुलना में कम भीड़ दिखाई दे रही है। वहीं नई दिल्ली का जंतर-मंतर और उसके आसपास का इलाका कड़ी सुरक्षा के घेरे में है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की भी तैनाती की गई है।
जंतर-मंतर पर क्यों बढ़ाई गई सुरक्षा?
दरअसल, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगाए जा रहे कथित अनियमितताओं के आरोपों के विरोध में 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। प्रदर्शन का आयोजन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), राज्यसभा सांसद मनोज झा और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण समेत अन्य संगठनों और नेताओं की ओर से किया गया है। AAP, NSUI और इंडियन यूथ कांग्रेस से जुड़े लोगों के भी प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना जताई गई है। साथ ही कॉकरोच जनता पार्टी के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है। प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने कहा है कि जंतर-मंतर पर बिना अनुमति किसी तरह का धरना, प्रदर्शन या मार्च नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की आशंका को देखते हुए इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई है।

चुनाव आयोग को लेकर क्या है विवाद?
इस पूरे विवाद का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) से जुड़ा है। विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने SIR की प्रक्रिया और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारी इसे लेकर चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखा है। आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत उसके फैसले तीन सदस्यीय चुनाव आयोग ने सामूहिक रूप से लिए और आयोग के भीतर इन फैसलों पर सहमति थी।
जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग
सुरक्षा व्यवस्था के तहत जंतर-मंतर, संसद मार्ग, टॉल्स्टॉय मार्ग, जनपथ और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती के साथ संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी कई मार्गों पर आवाजाही को नियंत्रित करने और जरूरत के अनुसार डायवर्जन की व्यवस्था की है।
इसके अलावा नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 लागू की गई है। इसके तहत बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों की सभा, जुलूस, प्रदर्शन, धरना और पिकेटिंग पर रोक है। बिना अनुमति नारे लगाने और भाषण देने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। आदेश का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
11 मेट्रो स्टेशन बंद, इन स्टेशनों पर असर
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद कर दिए गए हैं। ये स्टेशन हैं जनपथ पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, नई दिल्ली। हालांकि यात्रियों की सुविधा के लिए राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई है। इन स्टेशनों पर फिलहाल यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश या बाहर निकलने की अनुमति नहीं है, लेकिन दूसरी मेट्रो लाइन में बदलने की सुविधा उपलब्ध है।
पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और धारा 163 के आदेश का पालन करने की अपील की है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। पुलिस के मुताबिक किसी भी अनधिकृत सभा या प्रतिबंधों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या होगा इसका असर?
सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने का सीधा असर नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के यातायात पर पड़ सकता है। जंतर-मंतर, संसद मार्ग, जनपथ, टॉल्स्टॉय मार्ग और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग और ट्रैफिक डायवर्जन के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को इन इलाकों से अनावश्यक यात्रा से बचने और वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी है। फिलहाल पुलिस का फोकस जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में अनधिकृत भीड़ को नियंत्रित करने और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है।

