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IAS से इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल की सियासत में एंट्री, बोली- लोगों की आवाज़ बनना हैं, यूपी से करेंगी नई पारी की शुरूआत

IAS से इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल की सियासत में एंट्री, बोली- लोगों की आवाज़ बनना हैं, यूपी से करेंगी नई पारी की शुरूआत

UP News: उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद अपनी अगली पारी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को सुबह करीब 8:30 बजे जारी किए गए अपने वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगी और आम लोगों की आवाज बनने की कोशिश करेंगी।

दिव्या मित्तल ने साफ किया कि वह फिलहाल किसी मौजूदा राजनीतिक दल के साथ जुड़ने की बात नहीं कर रही हैं। उन्होंने लोगों के साथ मिलकर अपना राजनीतिक मंच खड़ा करने की बात कही है। उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए केवल किसी पद तक पहुंचने का जरिया नहीं होगी, बल्कि उन लोगों की आवाज उठाने का माध्यम होगी, जिनकी समस्याएं सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पातीं या पहुंचने के बाद भी सुनी नहीं जातीं।

सोशल मीडिया वीडियो में क्या कहा?

दिव्या मित्तल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियों के जरिए अपने अगले कदम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले IAS से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने लोगों के मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अब उन्होंने वीडियो के जरिए उन सवालों का जवाब दिया है।

उन्होंने कहा- लोगों ने मुझसे कहा कि तुम सब कुछ तो बन गईं, अब और क्या बनना चाहती हो? मुझे आवाज बनना है। उन लोगों की आवाज, जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती। उन्होंने आगे कहा कि वह ऐसे लोगों की तरफ से देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब चाहती हैं। इसी बात को उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा का एक प्रमुख आधार बताया है।

 

दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह गांव का जिक्र करते हुए बताया कि एक बार वह पहाड़ी इलाके में पानी पहुंचाने के काम के निरीक्षण के लिए गई थीं। इसी दौरान एक महिला उनके पास आई। उन्हें लगा कि महिला शायद पेंशन, पक्का मकान या किसी दूसरी सरकारी सुविधा की मांग करेगी, लेकिन महिला ने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए स्कूल की मांग रखी।

दिव्या मित्तल के मुताबिक, उस समय उस महिला के घर में पानी की सुविधा भी नहीं थी, लेकिन उसने अपने लिए पानी मांगने के बजाय बच्चों के लिए स्कूल की मांग की। उन्होंने बताया कि उन्होंने नियमों की जानकारी ली और स्कूल को स्वीकृति भी मिल गई, लेकिन तीन साल बाद भी स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हो सका। इस अनुभव को बताते हुए उन्होंने कहा- “अब मुझे बताइए कि क्या नहीं था? पैसा नहीं था, नियम नहीं था, स्वीकृति नहीं थी? था तो बस इरादा नहीं था। अगर इरादा होता तो पहाड़ भी रास्ता दे देता और इरादा नहीं था तो एक फाइल ही पहाड़ बन गई। मुझे उन गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए।”

इसके अलावा पूर्व IAS अधिकारी ने युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने पेपर लीक का उदाहरण देते हुए कहा कि एक छात्र कई वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है और अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी या पेपर लीक हो जाए तो उसकी मेहनत प्रभावित होती है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल और आने वाले समय में रोजगार से जुड़े सवालों पर भी चिंता जताई। दिव्या मित्तर ने  शिक्षकों, डॉक्टरों, किसानों, मजदूरों, वकीलों और छात्रों से जुड़ने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने अपना नया नारा ‘चलिए हिसाब मांगते हैं’ बताया है।

यूपी से ही शुरू होगी राजनीतिक पारी

दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक शुरुआत भी इसी प्रदेश से होगी। उन्होंने बताया कि जब वह अधिकारी के तौर पर उत्तर प्रदेश आई थीं, तब यहां के लोगों ने उन्हें परिवार का हिस्सा माना। इसी जुड़ाव की वजह से उन्होंने अपनी नई राजनीतिक यात्रा के लिए भी उत्तर प्रदेश को चुना है।Bउन्होंने लोगों से यह भी कहा कि “मुझ पर भरोसा मत करिए, अपने आप पर करिए।” उनके अनुसार उनकी कोशिश लोगों को साथ लेकर ऐसा मंच तैयार करने की होगी, जहां आम नागरिक अपने सवाल उठा सकें और जवाबदेही की मांग कर सकें।

कौन हैं दिव्या मित्तल?

बता दें कि दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। करीब 13 साल के प्रशासनिक करियर के दौरान वह उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं। वह देवरिया, संत कबीर नगर और मिर्जापुर की जिलाधिकारी भी रह चुकी हैं। बाद में वह उत्तर प्रदेश के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थीं। मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए लहुरियादह जैसे दुर्गम पहाड़ी गांव में पेयजल पहुंचाने की पहल के कारण वह काफी चर्चा में आई थी। गांव में लंबे समय से पानी की समस्या थी और उनके कार्यकाल में पाइपलाइन के जरिए वहां पानी पहुंचाने का काम हुआ।

हालांकि दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अपने करीब 13 साल के प्रशासनिक सफर को याद किया था। इस्तीफे के बाद उनके अगले कदम को लेकर राजनीति, कोचिंग, विदेश वापसी और लेखन समेत अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे थे।

उनका इस्तीफा सितंबर में स्वीकार कर लिया गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से 14 सितंबर को इसे मंजूरी दी गई और इसके बाद उनका प्रशासनिक सेवा का सफर औपचारिक रूप से समाप्त हो गया था। इस्तीफे के तुरंत बाद जब उनके राजनीति में आने को लेकर सवाल उठे थे, तब उन्होंने कहा था कि उन्होंने अभी अपने भविष्य को लेकर कोई फैसला नहीं किया है। इसके बाद आज यानी 29 सितंबर को सोशल मीडिया पर अपने राजनीति में आने की जानकारी देते हुए इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।

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