CJP ने 5 सितंबर का दिल्ली मार्च लिया वापस, SC में केंद्र के आश्वासन के बाद लिया फैसला

CJP ने 5 सितंबर का दिल्ली मार्च लिया वापस, SC में केंद्र के आश्वासन के बाद लिया फैसला

छात्रों से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दिए गए आश्वासन के बाद CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। मंगलवार  (1 सितंबर 2026) को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से छात्रों से किए गए तीन प्रमुख वादों को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई, और केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने, आगे इस तरह की नई एफआईआर नहीं दर्ज करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने को लेकर सरकार अपने आश्वासन पर कायम है। इसके बाद CJP की ओर से मार्च स्थगित करने का निर्णय अदालत में बताया गया।

छात्रों पर दर्ज 13 FIR को लेकर केंद्र का रुख

आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े छात्रों पर दर्ज 13 एफआईआर को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। हालांकि, भीड़ में शामिल ऐसे 2,873 लोगों के खिलाफ अलग से कार्रवाई की मांग की गई है, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड बताया गया है।

मेहता ने कहा कि इस संबंध में दिल्ली के अलावा बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल की ओर से भी आवेदन दिए गए हैं। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज संबंधित एफआईआर को खत्म करने या उन्हें आगे नहीं बढ़ाने का आदेश जारी करे।

आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा

सुनवाई के दौरान छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का मुद्दा भी उठा। जिसे केंद्र सरकार ने स्पष्ट करते हुए कहा कि वह इस आश्वासन से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन मुआवजा देने की प्रक्रिया और पात्रता तय करने के लिए कुछ समय की जरूरत होगी। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से इस पूरी व्यवस्था को तैयार करने के लिए तीन महीने का समय मांगा हैं। इसके बाद CJP की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने सवाल किया कि क्या तीन महीने की अवधि के भीतर मुआवजे का भुगतान भी किया जाएगा। तो इस पर तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि हां, इस अवधि में भुगतान भी किया जाएगा।

CJP ने क्यों वापस लिया 5 सितंबर का मार्च?

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के आश्वासन के बाद CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने अदालत को बताया कि सरकार के सकारात्मक रुख और अदालत की ओर से दिए जा रहे न्यायिक आदेश को देखते हुए मार्च वापस लेना उचित है। सौरभ दास ने सुनवाई के दौरान सरकार के प्रयासों की सराहना की और मामले में पैरवी कर रहे वकीलों का भी आभार जताया।

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गौरतलब है कि 5 सितंबर को CJP का यह मार्च दिल्ली में इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक प्रस्तावित था। छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर संगठन की ओर से यह प्रदर्शन किया जाना था और प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी।

इसके अलावा आज सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दोनों पक्षों के रुख पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर दोनों तरफ से अच्छी भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण रखा जाए तो हर मुद्दे का समाधान निकाला जा सकता है। इस सुनवाई के बाद फिलहाल छात्रों से जुड़ी एफआईआर और मुआवजे के मुद्दे पर केंद्र के आश्वासन को अदालत के रिकॉर्ड में लिया गया है। वहीं, CJP ने केंद्र के भरोसे के बाद 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को वापस लेने का फैसला किया है।

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