बच्चों की सोशल मीडिया लत पर मेटा को बड़ा झटका, 47 राज्यों से 17 अरब डॉलर में समझौता

बच्चों की सोशल मीडिया लत पर मेटा को बड़ा झटका, 47 राज्यों से 17 अरब डॉलर में समझौता

Meta Social Media Case: बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा को बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने अमेरिका के 47 राज्यों की ओर से लगाए गए आरोपों को खत्म करने के लिए करीब 17 अरब डॉलर के समझौते पर सहमति जताई है। इसके साथ ही मेटा को बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए अपने प्लेटफॉर्म्स पर कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे। अधिकारियों के मुताबिक, यह अमेरिकी उपभोक्ता सुरक्षा मामलों में सबसे बड़े समझौतों में से एक है।

17 अरब डॉलर का समझौता

इस समझौते के तहत मेटा 47 राज्यों के दावों का निपटारा करने के लिए 17 अरब डॉलर का भुगतान करेगी। वर्जीनिया को ही इस समझौते से करीब 353 मिलियन डॉलर मिलने की बात कही गई है, जिसे राज्य के इतिहास के बड़े कानूनी समझौतों में माना जा रहा है। मेटा के लिए यह रकम कंपनी के विशाल कारोबार की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन समझौते की असली अहमियत बच्चों की डिजिटल सुरक्षा से जुड़े नए नियमों में है। इसके बाद कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म्स पर तय सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा।

मेटा पर क्या लगे थे आरोप?

यह विवाद साल 2023 में उस समय तेज हुआ, जब कैलिफोर्निया समेत कई अमेरिकी राज्यों ने मेटा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। राज्यों का आरोप था कि कंपनी ने फेसबुक और इंस्टाग्राम में ऐसे फीचर्स तैयार किए, जिनका उद्देश्य यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना था। अभियोजन पक्ष का दावा था कि इन डिजाइन और एल्गोरिदम आधारित फीचर्स का बच्चों और किशोरों पर नकारात्मक असर पड़ा। आरोपों में सोशल मीडिया की आदत बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने की बात भी शामिल थी। इसके अलावा मेटा पर यह आरोप भी लगाया गया कि उसने अभिभावकों की अनुमति के बिना 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से संबंधित डेटा एकत्र किया।

बच्चों की सुरक्षा होगी मजबूत

इस समझौते के तहत मेटा को नाबालिग यूजर्स के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी होगी। प्रस्तावित उपायों में बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने और उन्हें लगातार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोकने के लिए नए सिस्टम शामिल हैं।

स्क्रीन टाइम पर सख्ती: बच्चों के लिए प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की अवधि सीमित करने और बीच-बीच में ब्रेक देने की व्यवस्था की जाएगी।

स्कूल टाइम में नोटिफिकेशन पर रोक: पढ़ाई के समय बच्चों को गैर-जरूरी पुश नोटिफिकेशन से दूर रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।

उम्र की पहचान होगी ज्यादा मजबूत: प्लेटफॉर्म पर उम्र की पुष्टि से जुड़े सिस्टम को मजबूत किया जाएगा, ताकि कम उम्र के बच्चे आयु-प्रतिबंधित सुविधाओं तक आसानी से न पहुंच सकें।

हानिकारक कंटेंट पर नियंत्रण: खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे संवेदनशील कंटेंट तक बच्चों की पहुंच को सीमित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे।

लाइक काउंट को लेकर बदलाव: बच्चों और किशोरों में सोशल तुलना का दबाव कम करने के लिए लाइक्स की संख्या को सीमित या कम प्रमुख दिखाने जैसे उपाय भी लागू किए जा सकते हैं।

इस मामले की सुनवाई कैलिफोर्निया के ऑकलैंड स्थित फेडरल कोर्ट में शुरू हो चुकी थी। इस दौरान मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की गवाही भी होने वाली थी, लेकिन समझौते के बाद ट्रायल आगे नहीं बढ़ सका। सुनवाई के दौरान इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी ने कंपनी की नीतियों का बचाव करते हुए गवाही दी थी। मेटा की ओर से बच्चों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों पर भी अदालत में पक्ष रखा गया।

2021 की रिपोर्ट से सामने आया था विवाद

इस मामले की पृष्ठभूमि साल 2021 में सामने आई उन रिपोर्ट्स से भी जुड़ी है, जिनमें दावा किया गया था कि मेटा को इंस्टाग्राम के किशोर यूजर्स, खासकर लड़कियों, पर पड़ने वाले कुछ नकारात्मक प्रभावों की जानकारी थी। बाद में कंपनी ने किशोरों के लिए अलग सुरक्षा फीचर्स और Teen Accounts जैसी व्यवस्थाएं शुरू कीं। हालांकि आलोचकों का कहना था कि ये कदम समस्या की तुलना में पर्याप्त नहीं हैं। वहीं मेटा के पूर्व इंजीनियरिंग डायरेक्टर आर्टुरो बेजर ने भी कंपनी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए अदालत में अपनी चिंताएं रखी थीं।

मामले में किसी निश्चित रकम को आधिकारिक जुर्माने के तौर पर तय नहीं किया गया था। हालांकि अदालत में मेटा की ओर से यह तर्क दिया गया था कि नियमों के उल्लंघन की गणना के आधार पर संभावित आर्थिक दायित्व 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। कानूनी जानकारों ने इस अनुमान को बेहद असामान्य और व्यावहारिक रूप से मुश्किल माना।

अब 17 अरब डॉलर के समझौते और नए सुरक्षा नियमों के साथ यह मामला सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका असर आने वाले समय में बच्चों और किशोरों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की नीतियों पर भी पड़ सकता है।

administrator

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *