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चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का बड़ा मार्च, 19 दलों के नेता होंगे शामिल, दिल्ली में बढ़ी सुरक्षा

चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का बड़ा मार्च, 19 दलों के नेता होंगे शामिल, दिल्ली में बढ़ी सुरक्षा

INDIA Bloc Protest at Jantar Mantar: दिल्ली में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर विपक्षी दलों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी में विपक्षी दलों के नेताओं ने करीब साढ़े तीन घंटे तक बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस बैठक में 19 राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल भी शामिल हुए। जिनमें कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी शामिल हुए। इसके अलावा टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, सीपीआई (एम) के एमए बेबी, सीपीआई (एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य और सीपीआई के पी. संतोष कुमार समेत कई विपक्षी नेता मौजूद रहे। इस बैठक में चुनाव प्रक्रिया, SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध पर 9 FIR

दरअसल जंतर-मंतर के आसपास पिछले कुछ दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली पुलिस ने कई मामले दर्ज किए हैं। पुलिस के मुताबिक, निषेधाज्ञा के उल्लंघन, दंगा करने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट से जुड़ी धाराओं में कुल 9 एफआईआर दर्ज की गई हैं। जिसमें कुल 18 लोगों की गिरफ्तारी की गई है, जबकि 300 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने के बाद रिहा कर दिया गया। इसके अलावा पुलिस आगामी दिनों में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर रही है।

बता दें कि आज स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 19 विपक्षी दल दिल्ली में स्थित चुनाव आयोग का घेराव करेंगे और इंडिया ब्लॉक के विपक्षी सांसद दिल्ली में सेव डेमोक्रेसी मार्च निकालेंगे। वही दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव भी इस मार्च में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गए है विपक्ष के मार्च के चलते आज संसद मार्ग, जंतर-मंतर और चुनाव आयोग के बाहर पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है जिनमें पुलिस आरएएफ समेत बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात है दिल्ली में सुरक्षा को लेकर भी पुलिस सतर्क है। नीति आयोग की इमारत के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा संसद के मकर द्वार और नॉर्थ एंट्रेंस गेट के आसपास भी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। यह प्रदर्शन संगठन के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा बताया गया है। इससे पहले जुलाई में भी संगठन ने दिल्ली में प्रदर्शन किया था। उस समय NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने रखीं तीन मांगें

बीते दिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी पार्टी की तीन मांगों को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि ये मांगें पार्टी के लिए गैर-समझौतावादी हैं। कांग्रेस की पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। दूसरी मांग SIR प्रक्रिया को रद्द करने की है। वहीं तीसरी मांग चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल को लेकर है।

खड़गे ने SIR को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के कारण करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है और आंकड़ों की आधिकारिक स्थिति को ध्यान में रखकर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

इसके अलावा कांग्रेस नेता उदित राज ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि उन्हें अपने पद से हटना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि अगर आज नहीं तो कल उन्हें पद छोड़ना होगा। उदित राज ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि यदि लोगों के वोट देने के अधिकार को प्रभावित किया गया है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

‘चुनाव आयोग पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल’

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग को लेकर शिकायतें और आपत्तियां कोई नई बात नहीं हैं। पहले भी चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल सामने आते रहे हैं। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का रवैया ऐसा दिखाई देता है जैसे केवल बीजेपी के लोगों को ही देश का नागरिक माना जा रहा हो और उन्हें ही वोट देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का पारदर्शी तरीके से जवाब मिलना जरूरी है।

फिलहाल राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों के मार्च और लगातार हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग के इस्तीफे और SIR को लेकर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, इस पूरे विवाद पर सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में विपक्ष का यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का क्या रुख रहता है।

 

 

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