अमेरिका में काम करने वाले भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि अमेरिकी सरकार ने आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आईटी कंपनियों को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया से निलंबित करने की घोषणा की है। इनमें कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, HCL टेक्नोलॉजीज, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं। अमेरिकी श्रम विभाग के इस फैसले के तहत इन कंपनियों से जुड़े नए और लंबित PERM आवेदनों पर कार्रवाई रोक दी गई है। इससे उन कर्मचारियों को परेशानी हो सकती है, जिनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।

अमेरिकी सरकार ने क्यों की कार्रवाई?
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े नियमों का दुरुपयोग किया और इससे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए। सरकार इस बात की जांच कर रही है कि कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी देने से पहले अमेरिकी नागरिकों और योग्य स्थानीय उम्मीदवारों को उचित अवसर दिया था या नहीं।
अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने 8 अक्टूबर 2026 को इस कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, HCL और कैपजेमिनी के साथ माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी को भी इस कार्रवाई में शामिल किया गया है। वहीं अमेरिकी सरकार के मुताबिक, इन कंपनियों ने वर्ष 2009 से विदेशी कर्मचारियों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन किए हैं। हालांकि, अभी सार्वजनिक रिपोर्टों में सभी कंपनियों के खिलाफ कथित उल्लंघनों के अलग-अलग और विस्तृत निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं।
क्या है PERM प्रोग्राम और ग्रीन कार्ड से इसका संबंध?
PERM का पूरा नाम Program Electronic Review Management है। यह अमेरिका में रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक अहम चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए अमेरिकी कर्मचारियों को उचित अवसर दिया गया है और विदेशी कर्मचारी को स्थायी रूप से नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन या रोजगार की स्थिति पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। इसके लिए कंपनी को निर्धारित वेतन संबंधी प्रक्रिया पूरी करने और नौकरी के लिए योग्य उम्मीदवारों की तलाश करने जैसे कदम उठाने होते हैं। श्रम विभाग से PERM मंजूर होने के बाद कंपनी कर्मचारी के रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। हालांकि PERM खुद ग्रीन कार्ड या वीजा नहीं है। यह स्थायी निवास हासिल करने के रास्ते का एक चरण है। वहीं, H-1B वीजा विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में निर्धारित शर्तों के तहत अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति देता है।

भारतीय आईटी कर्मचारियों पर क्या पड़ेगा असर?
इस फैसले का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिनके ग्रीन कार्ड आवेदन के लिए अभी PERM प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। संबंधित कंपनियां निलंबन जारी रहने तक नए PERM आवेदन दाखिल नहीं कर पाएंगी और लंबित आवेदनों पर भी कार्रवाई नहीं होगी। इससे कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू होने या आगे बढ़ने में देरी हो सकती है।
भारतीय कर्मचारियों के लिए यह चिंता इसलिए भी अहम है, क्योंकि अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की मांग अधिक होने के कारण भारतीय आवेदकों को पहले से ही लंबा इंतजार करना पड़ता है। अलग-अलग श्रेणियों में उपलब्ध ग्रीन कार्ड की संख्या और देश के आधार पर लागू सीमाएं भी इस इंतजार को प्रभावित करती हैं।
इसका असर उन कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है, जो H-1B वीजा पर लंबे समय से अमेरिका में काम कर रहे हैं और स्थायी निवास पाने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ परिस्थितियों में समय पर PERM आवेदन दाखिल होना H-1B वीजा की सामान्य छह साल की सीमा के बाद ठहरने की अवधि बढ़ाने से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में प्रक्रिया शुरू होने में देरी कुछ कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है। हालांकि, सभी कर्मचारियों की स्थिति एक जैसी नहीं होगी। PERM आवेदन की स्थिति, पहले से मिली मंजूरी और ग्रीन कार्ड की उपलब्धता के आधार पर प्रभाव अलग-अलग हो सकता है।
क्या H-1B वीजा और पहले से मिले ग्रीन कार्ड भी होंगे रद्द?
बता दें कि PERM प्रक्रिया पर निलंबन का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कंपनियों के सभी कर्मचारियों के H-1B वीजा या पहले से जारी ग्रीन कार्ड अपने आप रद्द हो जाएंगे। यह कार्रवाई मुख्य रूप से PERM श्रम प्रमाणन आवेदनों से संबंधित है। H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड की स्थिति अलग-अलग नियमों के तहत तय होती है। जिन कर्मचारियों की प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है, उन्हें अपने मामले की मौजूदा स्थिति के आधार पर जानकारी लेनी होगी। वहीं, जिनकी प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, उन्हें निलंबन हटने या आगे के सरकारी निर्देशों का इंतजार करना पड़ सकता है।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि निलंबन कितने समय तक जारी रहेगा और अमेरिकी श्रम विभाग की जांच के बाद संबंधित कंपनियों को आगे क्या निर्देश दिए जाएंगे। अमेरिकी प्रशासन ने कार्रवाई को कथित नियम उल्लंघनों और अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा से जोड़ा है। दूसरी ओर, माइक्रोसॉफ्ट ने अपने H-1B आवेदनों के बारे में कहा है कि उनमें बड़ी हिस्सेदारी मौजूदा कर्मचारियों की स्थिति बढ़ाने या बदलने से संबंधित थी।
कुल मिलाकर, अमेरिका के इस फैसले से आठ बड़ी कंपनियों में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों के रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर प्रत्येक कर्मचारी के आवेदन की स्थिति और आगे होने वाले सरकारी फैसलों पर निर्भर करेगा।

