श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: इस बार 4 सितंबर को पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाएगी। आमतौर पर इसकी सबसे भव्य छटा मथुरा और वृंदावन में देखने को मिलती हैं। अगर आप भी इस कृष्ण जन्माष्टमी भीड़भाड़ औरब लंबी-लंबी लाइनों से बचते हुए सुकून से श्रीकृष्ण के दर्शन करना चाहते हो, तो इन 5 जगहों पर जरूर जाए।
इस बार 4 सितंबर को पूरे देश में जन्माष्टमी मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे उत्साह से मनाया जाता है आमतौर पर मथुरा वृंदावन को ही श्रीकृष्ण भक्ति का केंद्र मना जाता हैं पूरे देश से लोग खासकर इस अवसर पर यहां आते हैं वैसे भारत में कई ऐसी जगह हैं जहां ये उत्सव उतनी ही आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाता हैं। अगर आप इस जन्माष्टमी मथुरा नहीं जा पा रहे तो इन 5 जगहों पर जाके कृष्ण की भक्ति मे झूम सकते हैं।
द्वारकाधीश मंदिर गुजरात
गुजरात का द्वारकाधीश मंदिर, जिसे जगत मंदिर भी कहा जाता हैं यहां जन्माष्टमी का उत्सव बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता हैं यहां दिन की शुरुआत मंगला आरती से होती हैं जिसके बाद भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित विशेष पूजा और महापूजा का आयोजन किया जाता हैं। जन्माष्टमी के दौरान मंदिर को फूलों और रोशनी से खूबसूरती से सजाया जाता हैं देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पूरे वातावरण में कृष्ण भक्ति और कीर्तन कि गूंज सुनाई देती हैं।
सांवलिया सेठ मंदिर राजस्थान
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिलें में स्थित प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर हैं सांवलिया सेठ मंदिर। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित हैं। माना जाता हैं कि भोलारम गुर्जर नामक एक चरवाहे को खुदाई के दौरान भगवान कृष्ण की मूर्ति मिली थी। उसी रात भगवान कृष्ण ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और मंदिर बनवाने का निर्देश दिया। सांवलिया सेठ मंदिर को सेठों के सेठ मंदिर भी कहा जाता हैं ऐसा इसलिए क्यूंकि इस मंदिर की ऐसे मान्यता हैं कि यहां आने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाती हैं।
मुंबई और पुणे, महाराष्ट्र
मुंबई और पुणे में जन्माष्टमी का त्योहार बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता हैं यहां की सबसे खास परंपरा दही हांडी हैं, जो पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। मान्यता हियाँ की बचपन में श्रीकृष्ण को माखन बहुत पसंद था इसीसे प्रेरित होकर दही हांडी का आयोजन किया जाता हैं। इसमे युवा सदस्य मिलकर ऊंचा मानव पिरामिड बनाते हैं और उचाई पर बंधी मिट्टी की हांडी को फोड़ते हैं। इस हांडी में दही, मेवे, और मट्ठा भरे होते हैं। इस रोमांचक आयोजन को देखने के लिए भारी संख्या में लोग आते है।
जगन्नाथ मंदिर पुरी, उड़ीशा
पुरी का जगन्नाथ मंदिर कृष्ण भक्तों के लिए खास महत्व रखता हैं। जन्माष्टमी के उत्सव की तैयारियां यहां कई दिनों पहले से शुरू हो जाती हैं। यहां जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, सुभद्रा की खास पूजा और रात्री आरती का आयोजन किया जाता हैं पुरी का शांत समुद्री तट और मंदिर का आध्यात्मिक माहौल जन्माष्टमी को खास बनाता हैं।
बिरला मंदिर, दिल्ली
दिल्ली का लक्ष्मी नारायण मंदिर जो बिरला मंदिर नाम से प्रसिद्ध हैं, जन्माष्टमी मनाने के लिए राजधानी की सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर को रंग बिरंगे फूलों से और लाइटों से सजाया जाता हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशी में आधीरात को महाआरती और अभिषेक जैसे विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दौरान हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुचकर पूजा अर्चना करते हैं, और भगवान का शीर्वाद प्राप्त करते हैं। जो लोग मथुरा वृंदवान नहीं जा सकते वो जन्माष्टमी का ये भव्य कार्यक्रम बिरला मंदिर में भी महसूस कर सकते हैं।