नीला रंग अपनाने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच’, मायावती का अखिलेश यादव समेत विपक्ष पर हमला

नीला रंग अपनाने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच’, मायावती का अखिलेश यादव समेत विपक्ष पर हमला

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज होती जा रही है। अलग-अलग दलों के बीच वोटबैंक को साधने और सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिशें लगातार दिखाई दे रही हैं। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (SP), कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। शुक्रवार (11 सितंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में मायावती ने बिना नाम लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि केवल बीएसपी के नीले रंग को अपनाने, नीला गमछा पहनने या मंच पर नीला कपड़ा लगाने से किसी पार्टी की सोच और नीतियां नहीं बदल जातीं।

मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि जिन पार्टियों की सोच और नीतियां लंबे समय से जातिवादी, संकीर्ण, सामंतवादी और पूंजीवादी रही हैं, वे केवल दिखावे के जरिए खुद को बहुजन समाज का हितैषी साबित नहीं कर सकतीं। मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है, जब समाजवादी पार्टी बहुजन समाज और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़े प्रतीकों को लेकर अपनी राजनीति में नीले रंग का इस्तेमाल बढ़ा रही है। मायावती ने विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि चुनावी फायदे के लिए पार्टियां समय-समय पर अपना रंग बदलती रहती हैं।

‘गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं विपक्षी दल’

मायावती ने विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा- कि कई पार्टियां चुनावी परिस्थितियों के हिसाब से अपना रंग बदलती हैं। यानी कहती कुछ है और करते ठीक उनके विपरीत है उन्होंने समाजवादी पार्टी की पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति पर भी सवाल उठाए।
मायावती का आरोप है कि चुनाव के समय बहुजन समाज के मुद्दों को प्रमुखता दी जाती है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद इन मुद्दों को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती। उन्होंने बहुजन समाज के लोगों से अपील की कि वे राजनीतिक दलों के नारों और बाहरी दिखावे के बजाय उनके इतिहास, नीतियों और वास्तविक कामकाज को देखें।

आकाश आनंद को लेकर कांग्रेस पर भी हमला

मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को लेकर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। आकाश आनंद को बसपा से बाहर किए जाने के बाद कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा था कि कांग्रेस के दरवाजे उनके लिए खुले हैं और पार्टी में उन्हें उचित मान-सम्मान दिया जाएगा। इस पर मायावती ने कांग्रेस को ‘डूबता जहाज’ बताते हुए सवाल किया कि कोई अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में क्यों डालेगा। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की।

पार्टी से निकाले गए नेताओं का भी किया जिक्र

मायावती ने पार्टी ने निकाले गए नेताओं का भी जिक्र करते हुए कहा- कि दूसरी पार्टियों की तरह बसपा में भी अनुशासनहीनता या पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण समय-समय पर कुछ नेताओं को बाहर किया जाता है। इसके बाद ऐसे कई नेता दूसरी पार्टियों में चले जाते हैं और कई बार पार्टी भी बदलते हैं। उन्होंने कहा कि केवल पार्टी से निकाले जाने के आधार पर किसी नेता को स्वार्थी या अवसरवादी मान लेना सही नहीं है। इसके लिए उसके राजनीतिक इतिहास और पूरे घटनाक्रम को समझना जरूरी है। मायावती ने बसपा के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन में अनुशासन और जिम्मेदारी को लेकर समय-समय पर फैसले लिए जाते हैं। ऐसे मामलों को केवल राजनीतिक अवसरवाद के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

अशोक सिद्धार्थ के इस्तीफे का भी आया जिक्र

मायावती के बयान में पार्टी से जुड़े नेताओं और संगठनात्मक फैसलों का मुद्दा भी सामने आया। इसी क्रम में अशोक सिद्धार्थ के इस्तीफे का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी में अनुशासन और जिम्मेदारी की जरूरत पर बात की। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए पार्टी को कई बार कड़े फैसले लेने पड़ते हैं। ऐसे मामलों को समझने के लिए सिर्फ इस्तीफे या पार्टी छोड़ने की घटना को नहीं, बल्कि उसके पीछे की पूरी परिस्थिति को देखना जरूरी है।

‘बहुजन समाज को दिखावे से सावधान रहने की जरूरत’

मायावती ने कहा कि आज कई राजनीतिक दल बहुजन समाज के मुद्दों और प्रतीकों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को सिर्फ रंग, कपड़े, गमछे या नारों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के लोगों को यह देखना चाहिए कि कौन-सी पार्टी वास्तव में उनके अधिकार, सम्मान और सामाजिक न्याय के लिए काम करती है। मायावती ने दावा किया कि बसपा लंबे समय से अंबेडकरवादी विचारधारा के आधार पर सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई लड़ रही है।
मायावती का यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वोटों को लेकर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच आया है। अखिलेश यादव की ओर से नीले रंग को बहुजन समाज और आंबेडकरवादी विचारधारा से जोड़ने के बाद मायावती का यह पलटवार दोनों दलों के बीच वैचारिक और राजनीतिक खींचतान को और तेज करता दिख रहा है।

अखिलेश यादव ने क्या कहा था?

बता दें कि मायावती के बयान को समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया नीले रंग से जुड़े बयानों और गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। जब अखिलेश यादव 31 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गले में नीला गमछा डालकर पहुंचे थे। इसके अलावा उन्होंने सपा की छात्र विंग ‘सपा छात्र सभा’ के लिए नई नीली ड्रेस भी लॉन्च की थी जबकि इससे पहले सपा छात्र सभा के कार्यकर्ता लाल शर्ट या कुर्ता पहनते थे। वहीं इस नई ड्रेस को लेकर अखिलेश यादव ने कहा था कि नीला रंग केवल एक रंग नहीं, बल्कि विचारधारा से भी जुड़ा है। उन्होंने बताया था कि नीला रंग लोकतंत्र, संविधान, आकाश, बहुजन समाज और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़ा हुआ है। अब छात्र सभा के लिए नीले रंग की ड्रेस को लेकर पार्टी ने नया संदेश देने की कोशिश की है। इसी के बाद मायावती ने बिना का नाम लिए कहा कि नीला रंग अपनाने से किसी पार्टी की जातिवादी सोच नहीं बदल जाएगी। उनके बयान को अखिलेश यादव और सपा की इस नई रणनीति पर सीधे तंज के तौर पर देखा जा रहा है।

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