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SIR Controversy: राहुल-खड़गे को CJI सूर्यकांत से नहीं मिला मिलने का समय, सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की तैयारी; 6 मेट्रो स्टेशन बंद

SIR Controversy: राहुल-खड़गे को CJI सूर्यकांत से नहीं मिला मिलने का समय, सुप्रीम कोर्ट तक मार्च की तैयारी; 6 मेट्रो स्टेशन बंद

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति में टकराव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया है। इसी बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेताओं को मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने सोमवार (12 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी की है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जैसे मुद्दों पर न्यायपालिका के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं। वहीं, CJI कार्यालय की ओर से दिए गए जवाब में संबंधित मुद्दों को अदालत की निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के तहत उठाने का विकल्प बताया गया है। ऐसे में SIR को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक विरोध के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक मर्यादाओं की चर्चा के केंद्र में भी आ गया है।

CJI ने मुलाकात का समय देने से क्यों किया इनकार?

जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने CJI जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात का अनुरोध किया था। वे चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों और SIR के मुद्दे पर चर्चा करना चाहते थे। हालांकि, CJI कार्यालय ने मुलाकात के लिए समय देने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि कार्यालय की ओर से भेजे गए जवाब में कहा गया कि SIR से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में पहले से विचाराधीन है। जस्टिस सूर्यकांत उस मामले की सुनवाई करने वाली पीठ की अध्यक्षता भी कर रहे हैं। ऐसी परिस्थिति में प्रशासनिक स्तर पर मुलाकात करके मामले में निर्देश देना उचित नहीं होगा।

CJI कार्यालय का रुख यह है कि अदालत में लंबित मामलों से जुड़े सवालों पर निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। किसी प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रशासनिक मुलाकात के माध्यम से उन मुद्दों पर आदेश देने के बजाय संबंधित पक्ष अदालत में याचिका या आवेदन दाखिल कर सकते हैं।

विपक्षी नेताओं के पास याचिका दाखिल करने का विकल्प

बता दें कि मुलाकात का समय नहीं मिलने के बाद विपक्षी नेताओं के सामने अब न्यायिक रास्ता अपनाने का विकल्प है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबकि संबंधित मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए आज वे सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक याचिका दाखिल कर सकते हैं। इसके अलावा यह भी है कि SIR से संबंधित मामले मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। ऐसे में विपक्षी नेता सोमवार को याचिका दाखिल करने का फैसला कर सकते हैं। हालांकि, किसी नई याचिका पर सुनवाई होगी या नहीं, यह अदालत के नियमों और संबंधित पीठ के निर्णय पर निर्भर करेगा।

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी

CJI से मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाने के बावजूद कांग्रेस की ओर से सोमवार (12 अक्टूबर 2026) को सुप्रीम कोर्ट तक विपक्षी मार्च निकालने का प्रस्ताव सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार यह मार्च दोपहर 1:30 बजे कनॉट प्लेस से शुरू करने की योजना है। इसमें इंडिया ब्लॉक के नेताओं और नागरिक समाज से जुड़े लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी प्रतिनिधिमंडल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाने की तैयारी में है। हालांकि, CJI कार्यालय ने प्रस्तावित मार्च को लेकर कोई राय नहीं दी है।

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद बढ़ा विवाद

SIR के मुद्दे पर बीते कई दिनों से विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी कड़ी में 10 अक्टूबर को मध्य दिल्ली के कई इलाकों में प्रदर्शन किए गए, जिसके मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। इनमें अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी सहित कई नेता और छात्र भी शामिल बताए गए। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों को करीब 24 घंटे बाद रिहा कर दिया गया। वहीं, प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोके जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे और रविवार को कई विपक्षी नेताओं ने सरकार तथा दिल्ली पुलिस की आलोचना की।

इसी बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी SIR के खिलाफ अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया है। संगठन के नेता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि पार्टी के नेता शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख तय कराने के उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों से संपर्क करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए नेता संसदीय स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तारीख देने का अनुरोध करेंगे। रांका के मुताबिक, यदि तय समय के भीतर तारीख नहीं दी जाती है, तो पार्टी अपने स्तर पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान कर सकती है।

वहीं, रविवार को हिरासत से रिहा होने के बाद CJP के नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। हिरासत में लिए गए लोगों में सांसद जॉन ब्रिटास और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा के नाम भी सामने आए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद SIR को लेकर जारी विरोध के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की हिरासत और दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों का मुद्दा भी चर्चा में बना हुआ है।

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दिल्ली मेट्रो के छह स्टेशनों पर प्रतिबंध

दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सोमवार को छह मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार शाम 4 बजे तक बंद रखने की सूचना दी। इनमें जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंबा रोड, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक और पटेल चौक शामिल हैं। DMRC के अनुसार, इन स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति की समीक्षा करने के बाद आगे की जानकारी दे सकती हैं। मेट्रो स्टेशनों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को केंद्र सरकार को सामान्य मेट्रो सेवाएं और निर्बाध इंटरनेट पहुंच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि प्रतिबंधों को संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।

SIR को लेकर जारी विवाद में अब तीन अहम पहलू सामने हैं—विपक्ष का राजनीतिक विरोध, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की न्यायिक प्रक्रिया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अपनी शिकायतों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, जबकि CJI कार्यालय ने संबंधित मुद्दों को अदालत में औपचारिक रूप से उठाने का रास्ता बताया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी नेता याचिका दाखिल करते हैं या नहीं और अदालत में संबंधित मामलों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल, CJI से मुलाकात का अनुरोध अस्वीकार किए जाने के बाद भी SIR का मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना हुआ है।

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