Krishna Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पर्व भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता हैं। इस दिन मंदिरों से लेकर घरों तक कान्हा के जन्म की तैयारियां जोरों पर रहती हैं। भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय उनका पंचामृत से अभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना, आरती और भोग लगाते हैं। जन्माष्टमी में पूजा के लिए मध्यरात्रि का समय विशेष माना जाता हैं, इसलिए भक्त शुभ मुहूर्त का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
वहीं, जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले कई श्रद्धालुओं के लिए चंद्रोदय का समय भी बेहद महत्वपूर्ण होता हैं। मान्यता के अनुसार, चंद्र देव को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद लोग अपना व्रत खोलते हैं। ऐसे में अगर आपने भी इस साल जन्माष्टमी का व्रत रखा हैं, तो आपके मन भी यह सवाल जरूर होगा कि कान्हा की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा और जन्माष्टमी की रात चांद कितने बजे दिखाई देगा? तो चलिए जानते है पूजा के शुभ मुहूर्त से लेकर आपके शहर में चंद्रोदय के समय तक की पूरी जानकारी।
जन्माष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
नई दिल्ली: रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक, 5 सितंबर
नोएडा: रात 11:57 बजे से 12:42 बजे तक, 5 सितंबर
मथुरा-वृंदावन: रात करीब 11:57 बजे से 12:41 बजे तक, 5 सितंबर
गुरुग्राम: रात 11:58 बजे से 12:44 बजे तक, 5 सितंबर
पुणे: रात 12:10 बजे से 12:57 बजे तक, 5 सितंबर
मुंबई: रात 12:14 बजे से 1:01 बजे तक, 5 सितंबर
इन समयों में खास बात यह है कि कई शहरों में पूजा का मुहूर्त आधी रात के बाद तक जाता है। इसलिए कैलेंडर की तारीख के हिसाब से यह 4 सितंबर की रात से शुरू होकर 5 सितंबर की शुरुआत तक रहेगा।
जन्माष्टमी की रात कब निकलेगा चांद?
जन्माष्टमी व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए चंद्रोदय का समय भी महत्वपूर्ण होता है। पंचांग के अनुसार 4 सितंबर की रात-
नई दिल्ली: रात करीब 11:29 बजे
नोएडा: रात करीब 11:28 बजे
गुरुग्राम: रात करीब 11:30 बजे
वृंदावन: रात करीब 11:30 बजे
चंद्रोदय का समय स्थान के अनुसार बदलता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
जन्माष्टमी 2026 व्रत पारण का समय
जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्तों के लिए पारण का समय भी विशेष महत्व रखता है वही व्रत पारण को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। पंचांग आधारित धर्मशास्त्रीय गणना के अनुसार 5 सितंबर 2026 की सुबह 06:08 बजे के बाद व्रत खोलना उचित माना गया है। हालांकि, समाज में प्रचलित मान्यता के अनुसार 4 सितंबर की रात 12:52 बजे के बाद भी पारण किया जाता है। भक्त अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार व्रत का पारण कर सकते हैं।
जन्माष्टमी पर ऐसे करें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा
जन्माष्टमी की रात निशीथ काल में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। भक्त अपनी परंपरा के अनुसार सबसे पहले बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं। इसके बाद स्वच्छ जल से स्नान कराकर भगवान को नए वस्त्र पहनाएं। फिर भगवान श्रीकृष्ण को तिलक लगाकर माखन-मिश्री, फल, मिठाई और अन्य सात्विक भोग अर्पित करें। इसके बाद श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप, भजन या चालीसा का पाठ कर आरती करें। पूजा के अंत में भगवान से सुख-शांति और परिवार की मंगलकामना करें तथा प्रसाद ग्रहण करें।