Ganesh chaturthi 2026 : इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत 14 सितंबर से हो रही हैं और इस पावन अवसर पर भारत के कई शहरों में भव्य पंडाल सजायें जाएंगे। गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू होते ही पूरा शहर भक्ति और उत्साह के रंग में रंग जाता हैं। गली-मोहल्लों से लेकर बड़े-बड़े पंडालों तक हर तरफ ढोल-ताशों की गूंज और ‘गणपती बप्पा मोरया’ के जयकारे सुनाई देने लगते हैं। जगह-जगह सजे खूबसूरत पंडाल, बप्पा की भव्य प्रतिमाएं और रोशनी से जगमगाते रास्ते इस त्योहार की रौनक को कई गुण बड़ा देते हैं;। वहीं, ताजे मोदकों की खुशबू और पूजा-पाठ का माहौल लोगों के उत्साह को और खास बना देता हैं।
गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल हैं, जिसे भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता हैं। इस अवसर पर भक्त अपने घरों के साथ-साथ सार्वजनिक पंडालों में भी गणपती बप्पा की प्रतिमा स्थापित करते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभता का प्रतीक माना जाता हैं। भक्तों का विश्वास हैं कि बप्पा की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता हैं। त्योहार के करीब आते ही देश के कई शहरों में इसकी तैयारियां तेज हो जाती हैं। खासतौर पर मुंबई, पुणे और अन्य बड़े शहरों में आकर्षक सजावट और भव्य गणपति पंडाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। कुछ पंडाल अपनी विशाल गणपति प्रतिमा के लिए मशहूर हैं, तो कुछ अपनी अनोखी सजावट और वर्षों पुरानी परंपरा के लिए पहचाने जाते हैं। अगर आप गणेश उत्सव के दौरान खास धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव लेना चाहते हैं, तो देश के इन 3 प्रसिद्ध गणपति पंडालों के दर्शन जरूर कर सकते हैं।
लालबागचा राजा, मुंबई
ललबागचा राजा सबसे प्रसिद्ध पंडालों में से एक हैं। जीसे मन्नतों का राजा ‘नवसाचा गणपती’ माना जाता हैं लोगों में यह दृढ़ विश्वास हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती हैं जिसके कारण आम जनता से लेकर बड़े-बड़े राजनेता और सेलिब्रिटी भगवान के दर्शन के लिए 20 से 40 घंटों की लाइनों में खड़े रहते हैं। इसकी शुरुआत साल 1934 में स्थानीय मच्छुआरों और व्यापारियों द्वारा मन्नत पूरी होने की खुशी में की गई थी। हर साल यहां 18 से 20 फिट की भव्य मूर्ति स्थापित की जाती हैं जिसे करोड़ों रुपए के सोने चांदी से सजाया जाता हैं और अनंत चतुर्थी पर होने वाले इसके विसर्जन यात्रा पर लाखों भक्तों का जनसैलाब उमड़ता हैं।
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति, पुणे
पुणे का श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर अपनी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना 1893 में दगडूशेठ हलवाई और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई ने की थी। कहा जाता है कि बेटे की मृत्यु के बाद उन्होंने गुरु की सलाह पर गणपति मंदिर बनवाया। बाद में लोकमान्य तिलक ने इसे सार्वजनिक गणेशोत्सव का प्रमुख केंद्र बनाया। आज यहां भगवान गणेश की करीब 7.5 फीट ऊंची भव्य मूर्ति विराजमान है। मूर्ति सोने और कीमती रत्नों से सुसज्जित है। इस पंडाल में भक्ति, संसकृति और शानदार सजावट का सुंदर मेल देखने को मिलता हैं।
खैरताबाद गणेश उत्सव, हैदराबाद
हैदराबाद का खैरताबाद गणेश उत्सव पूरे भारत में अपनी विशालकाय मूर्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। जिसकी शुरुआत साल 1954 में स्वतंत्रतात सेनानी सिंगारी शयरैया द्वारा केवल 1 फिट की मूर्ति से की गई थी। यह उत्सव आज देश के सबसे बड़े सार्वजनिक पंडालों में गिना जाता हैं। जहां हर साल भगवान गणेश की रिकॉर्ड तोड़ ऊंची और नए अवतार की प्रतिमा स्थापित की जाती हैं इस पंडाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इतनी विशालकाय मूर्ति को पर्यावरण की रक्षा के लिए पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली मिट्टी (Clay) और जैविक रंगों से बनाया जाता है। बप्पा के हाथ में रखा जाने वाला क्विंटलों वजनी विशाल लड्डू और अनंत चतुर्दशी पर विशाल क्रेन की मदद से हुसैन सागर झील में होने वाला भव्य विसर्जन इस उत्सव को पूरी दुनिया में अद्वितीय बनाता है।